अंबिकापुर

Video : हाथियों ने यहां मचाया तांडव, 30 घर तोड़े और 60 एकड़ में लगी किसानों की मेहनत की बर्बाद

कुकुरटांगा बस्ती व मनोहर पतरापारा में हाथियों ने पूरी रात मचाया उत्पात, पिछले एक महीने में लखनपुर वन परिक्षेत्र में किया इतना नुकसान

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लखनपुर. लखनपुर वन परिक्षेत्र के सुदूर वनांचल ग्राम पंचायत पटकुरा के कुकुरटांगा बस्ती व मनोहर पतरापारा में सोमवार की रात ६ हाथियों के दल ने जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने 4 ग्रामीणों का घर तोडऩे के साथ ही ५ एकड़ फसल भी बर्बाद कर दी। पूरी रात ग्रामीण दहशत में रहे। हाथियों के आतंक से ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

कुल 30 हाथी पतरापारा, कुकुरटांगा बस्ती व धर्मजयगढ़ सीमा से लगे चापकछार में अलग-अलग दल में बंटकर उत्पात मचा रहे हंै और वन अमला लाचार नजर आ रहा है। पिछले एक महीने में हाथी 30 घर तोडऩे के अलावा 60 एकड़ में लगी धान व मक्के की फसल बर्बाद कर चुके हैं।

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लखनपुर वन परिक्षेत्र विगत एक महीने से हाथियों का दल उत्पात मचा रहा है। अब तक हाथी 30 ग्रामीणों का घर तोडऩे के साथ ही ६० एकड़ फसल भी बर्बाद कर चुके हैं। किसानों को धान, मक्का व अन्य फसलों के बर्बाद होने से काफी नुकसान झेलना पड़ा है। हाथियों ने एक व्यक्ति की भी जान ले ली है। ग्रामीण परेशान हैं, उन्हें अभी तक पूर्व में ही घर व फसल के नुकसान का मुआवजा नहीं मिल पाया था कि रात में हाथी फिर बस्ती में आ धमके।

सोमवार की रात ६ हाथियों का दल ग्राम पंचायत पटकुरा के कुकुरटांगा बस्ती में आ पहुंचा। यहां हाथियों ने तीन ग्रामीण रामाधार यादव पिता त्रिवेणी यादव, यूएस तिर्की व गाडा पिता सन्धन मझवा का घर तोड़कर तहस-नहस कर दिया। इसके बाद हाथी मनोहरपतरापारा पहुंचे और यहां प्यारी यादव पति सुखु यादव का घर तोड़ डाला। इसके अलावा हाथियों ने ग्रामीणों की 4-5 एकड़ में लगी धान व मक्के की फसल भी बर्बाद कर दी। हाथियों के उत्पात से पूरी रात ग्रामीण दहशत में रहे।


दिन में एक जगह रहते हैं हाथी
लखनपुर वन परिक्षेत्र में अभी कुल 30 हाथी अलग-अलग दल में विचरण कर रहे हैं। दिन में हाथी एक जगह रहते हैं और शाम होते तक अलग-अलग दल में बंटकर उत्पात मचाते हैं। अभी दल के 6 हाथी कुकुरटांगा बस्ती, १२ झिंगाडोढ़ा, ६ धरमजयगढ़ सीमा के पास चापाकछार और बाकी के 6 हाथी अन्य क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं।


रतजगा कर रहे ग्रामीण
हाथी प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण अपने जन-धन की सुरक्षा खुद कर रहे हैं। हाथियों के बस्ती में घुसने के साथ ही पूरे ग्रामीण एकजुट होकर पूरी रात अलाव जलाकर जगते हैं। साथ ही हाथियों को खदेडऩे के लिए ढोल-नगाड़ा व पटाखों का उपयोग करते हैं।

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Updated on:
19 Sept 2017 06:50 pm
Published on:
19 Sept 2017 06:44 pm
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