लुंड्रा वन परिक्षेत्र में 11 सदस्यीय हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार की रात हाथियों ने ग्राम चित्तरपुर व डूमरडीह में 6 घरों को तहस-नहस कर दिया। साथ ही कई एकड़ फसल व सब्जी की खेती को नुकसान पहुंचाया। हाथियों के आतंक से करीब 15 ग्रामों के लोग रतजगा करने को मजबूर हैं। विगत एक पखवाड़े में हाथियों ने 27 घरों को तोड़ डाला है।
सोमवार की रात लगभग 8 बजे हाथियों का दल चित्तरपुर जंगल से निकलकर बस्ती में पहुंच गया। यहां हाथियों ने चेतवंती पति कृष्णा यादव, दिलबसिया पति रंगेश यादव, तोती पति छत्रधर यादव व चमरू पति टंगना के घर को तोड़ डाला। दहशत में आए इन घरों में रह रहे लोगों ने किसी तरह बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। हाथियों के बस्ती में घुसने पर पूरा गांव बाहर निकल आया और उन्हें खदेडऩे में लग गया।
धान खरीदी केंद्र के नजदीक पहुंचे, पटाखे फोड़ भगाया
फार्म हाऊस में उत्पात मचाने के बाद हाथी ग्राम डूमरडीह के धान खरीदी केंद्र के एकदम नजदीक पहुंच गए थे। लेकिन ऐन वक्त पर ग्रामीणों द्वारा पटाखा फोड़ देने से हाथी बस्ती की ओर चले गए। फिर यहां चांदो पति श्यामू नगेसिया व मीना पति स्व. प्रदीप के घर को तोड़ डाला। फिर हाथियों ने ग्राम दिवरी में कई एकड़ में लगी फसल को रौंद कर बर्बाद कर दिया।
रात 11 बजे हाथियों का दल ग्राम ककनी व डूमरडीह के बीच यूनूस खान के फार्म हाऊस पहुंचा। यहां हाथियों ने एक पिकअप टमाटर को रौंद डाला और ग्रीन हाऊस जिसमें सब्जी की खेती होती है, उसे तहस-नहस कर दिया।
हाथियों के आतंक से कड़ाके की ठंड में एक दर्जन से भी अधिक गांव के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हाथियों के विचरण व उत्पात मचाने से चित्तरपुर, कोइलारी, गगोली, ककनी, डूमरडीह, सपड़ा, भेडिय़ा, दिवरी, कछार, छेरमुण्डा, आसनडीह, दून्दू, जोरी, रघुपुर, परसाढोढ़ी व अन्य ग्राम के लोग रतजगा करने को मजबूर हैं।