
अंबिकापुर. प्रदेश में कांग्रस की सरकार (Congress Government) को 2 साल से ज्यादा का समय हो गया है। सरकार की नीति से लोग परेशान हैं। विशेषकर किसान ज्यादा परेशान हैं। योजनाबद्ध तरीके से सरकार ने गिरदावरी के नाम पर किसानों का रकबा कम कर दिया, ताकि सरकार को धान कम खरीदना पड़े। सरगुजा में रेत माफिया सक्रिय है और सरकार सरकारी जमीनें बेच रही है।
उक्त बातें रविवार को भाजपा कार्यालय (BJP office) में आयोजित पत्रवार्ता में भाजपा प्रदेश महामंत्री व भाजपा सरगुजा संभाग प्रभारी नारायण चंदेल (Narayan Chandel) ने कहीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार किसानों की जमीन की चोरी हुई है। सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से जिला प्रशासन के साथ मिल कर कई किसानों का रकबा शून्य कर दिया गया है।
ताकि सरकार को धान खरीदना नहीं पड़े। सरकार कुल मिलाकर धान खरीदी (Paddy purchase) नहीं करना चाह रही है। पहले ही धान खरीदी लेट से शुरू की गई। वहीं किसान धान बेचने के लिए टोकन के लिए परेशान हैं। किसानों को धान खरीदी केन्द्रों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
भाजपा शासन काल में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू हो जाती थी। किसानों को धान खरीदी में कोई परेशानी नहीं होती थी। आज किसान बारदाने को लेकर परेशान हैं।
धान खरीदी से भागना चाह रही सरकार
नारायण चंदेल ने भूपेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार धान खरीदी से भागना चाह रही है। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि प्रदेश में धान खरीदी 15 फरवरी तक की जाए, कई किसान अभी भी धान नहीं बेच पाए हैं। सरकार 31 जनवरी से धान खरीदी बंद करना चाह रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई किसानों ने सरकार के नीति से परेशान होकर आत्महत्या (Commits Suicide) कर ली है।
भाजपा का दूसरा आंदोलन 22 से
भाजपा सरगुजा संभाग प्रभारी नारायण चंदेल ने कहा कि प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदेश में भाजपा का दूसरा आंदोलन 22 जनवरी से शुरू होगा। प्रदर्शन में किसान भी शामिल होंगे और जिले के कलक्टर कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
सरगुजा संभाग में रेत माफिया सक्रिय
चंदेल ने कहा कि सरगुजा संभाग में रेत माफिया (Sand smugglers) सक्रिय हैं। शासन के संरक्षण में रेत का अवैध कारोबार हो रहा है। कई गुना ज्यादा दामों पर लोगों को रेत मिल रहा है। कोई सरकार पहली बार सरकारी संपत्ति को दोहन कराने में लगी है।
सरकार शासकीय जमीन को बेच रही है। आने वाले समय में सरकार के पास सरकारी जमीन नहीं रहेगी। इससे क्षेत्र का विकास अवरूद्ध हो जाएगा। क्षेत्र का डवलपमेंट रूक जाएगा।