अंबिकापुर

CG Art: महिलाओं के लिए मिसाल बनी देवरानी-जेठानी की जोड़ी, कपड़ों में गोदना आर्ट से मिली नई पहचान

CG Art: अंबिकापुर के छोटे से गांव जमगला टिकरापारा की रामकेली पावले गोदना आर्ट के जरिए स्वावलंबी बन गई हैं। वे दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं। उनके साथ देवरानी बिलासो पावले भी जुड़ी हुई हैं।

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CG Art: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के छोटे से गांव जमगला टिकरापारा की रामकेली पावले गोदना आर्ट के जरिए स्वावलंबी बन गई हैं। वे दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं। उनके साथ देवरानी बिलासो पावले भी जुड़ी हुई हैं। यह आर्ट कपड़ों पर आकर्षक डिजाइन बनाने का एक पारंपरिक तरीका है। गोदना आर्ट में महारत हासिल कर चुकी ये महिलाएं कपड़ों की प्रदर्शनी लगाने डीडीयू ऑडिटोरियम में चल रहे ग्रीन समिट पहुंची हैं।

CG Art: उन्होंने बताया कि इससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं और दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। राम केली बताती हैं, मैं 12 साल की थी तब पिता से गोदना कला का प्रशिक्षण लिया था। अब मुझे यह काम करते हुए 58 साल हो गया है।

CG Art: जांजगीर-चांपा से मंगाते हैं कपड़े

70 वर्षीय आदिवासी महिला राम केली पावले नारी शक्ति समूह के माध्यम से कपड़ों में गोदना बनाकर आत्मनिर्भर बन गई हैं। वे बताती हैं कि कोसा और कॉटन के कपड़े जांजगीर चांपा से मंगाती हैं। उनके समूह में नौ महिलाएं और जुड़ी हैं। इससे महिलाओं को अच्छी आमदानी हो जाती है।

नई पीढ़ी को सिखाने का लक्ष्य

मैंने इस कला को देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनी के जरिए पहुंचाया है। इसकी मांग विदेशों में भी है। इस कला ने मुझे कई मंचों पर सम्मान दिलाया है। मैं चाहती हूं कि नई पीढ़ी भी इसमें रुचि ले ताकि विरासत में मिली कला आगे बढ़ाई जा सके। इसके लिए मैंने प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि विरासत को आगे तक लेकर जाएं ताकि हमारी संस्कृति जीवित रहे।

Published on:
05 Oct 2024 05:52 pm
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