अंबिकापुर

वोटिंग के बाद अब कोई नहीं पूछ रहा वोटरों को, जीत-हार के गुणा-गणित में भिड़े प्रत्याशी, मुद्दों पर हो गए मौन

चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशियों ने गली-गली व घर-घर संपर्क कर उठाया था जनता की परेशानियों को, अब कोई नहीं कर रहा इस पर बात
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अंबिकापुर. मतदान के बाद से प्रत्याशी नदारद हो गए और मुद्दे पर मौन हैं। 20 नवंबर मतदान के दिन तक सभी दलों के प्रत्याशी और उनके समर्थक जनता से लुभावने और बड़ी-बड़ी बातें करते रहे। गली-गली घूमकर, घर-घर संपर्क कर, सभाओं और बैठकों और यहां तक की सोशल मीडिया पर भी हर उन मुद्दों को उठाया जिनसे जनता परेशान हैं।

अब मतदान के बाद कोई इस विषय पर बात तक नहीं कर रहा है। कोई भी प्रत्याशी चुनाव के दौरान उनके द्वारा किए गए दावे, वादे और लोगों को दिखाए लुभावने सपने पर बात नहीं कर रहा। ऐसे में जनता खुद तय करे कि वे कैसे धोखा खाते हैं।


मेडिकल कॉलेज
मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा व्यवस्था किसी से छिपी नहीं है। सेटअप की कमी और लचर व्यवस्था से हर दिन विवाद की स्थिति बनती है। यहां लोगों का प्रॉपर इलाज नहीं हो पा रहा है।


पेयजल
अधिकांश गांवों में पेयजल की समस्या है। कई गांव में नल-जल योजना शुरू कर दी गई है, लेकिन आज भी लोगों के घर तक पानी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। जनता गंभीर समस्या से जूझ रही है, पर किसी ने कोई बात नहीं की।

सिंचाई
सिंचाई सुविधा का अभाव है। इसलिए किसान धान के अलावा रबी की फसल में रूचि नहीं लेते। जमीन बेकार खाली पड़ी रहती है। क्षेत्र की बड़ी समस्या होने के बावजूद कोई बयानबाजी नहीं हुई।


अतिक्रमण
चारागाह और खेल मैदान की शासकीय जमीन अतिक्रमण की चपेट में है। कई गांवों में मवेशियों को घुमाने तक के लिए जमीन नहीं बची है। वोट बैंंक की राजनीति के कारण प्रत्याशी इस विषय पर बात करने से कन्नी काटते रहे।


पार्किंग
शहर में पार्किंग बड़ी समस्या है। यहां स्टेशन रोड, गांधी चौक, देवीगंज रोड, सदर रोड व स्कूल रोड का पूरा क्षेत्र कहीं भी ऐसा नहीं है जहां पर रोज जाम नहीं लगती हो। सड़कें संकरी हो गर्इं हंै।


ट्रांसपोर्टनगर
निगम क्षेत्र में ट्रांसपोर्टनगर बनाने के लिए कई बार प्रयास किए गए हंै, पर आज तक शुरू नहीं किया जा सका है। आधे-अधूरे निर्माण को लेकर दोनों पक्ष सिर्फ एक दूसरे पर आरोप लगाते आ रहे हैं।


रोजगार
शहरीकरण ने लोगों की खेती और रोजगार दोनों छीन लिया। उद्योग वाले जल, जमीन गांवों का इस्तेमाल कर रहे हैं और मजदूर बाहर से बुलवा रहे हैं। खासतौर पर पढ़े- लिखे युवकों को हक मारा जा रहा है।


स्वास्थ्य
क्षेत्र में शासकीय चिकित्सा सेवाओं का बहुत ही बुरा हाल है। कहने को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो खोल दिए गए हैं, पर डाक्टरों के अभाव में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।


सड़कें
शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में सड़कों की हालत काफी खस्ताहाल है। सड़कों को लेकर भाजपा-कांग्रेस हमेशा आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे हैं। चुनाव के दौरान भी शहर सहित आसपास की सड़कें एक महत्वपूर्ण मुद्दा था।

Published on:
26 Nov 2018 05:23 pm
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