हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी सरगवां में अपने आशियाने का सपना लोगों को अब तक पूरा नहीं हुआ। बोर्ड द्वारा कॉलोनी में अपने घर का सपना लोगों को 2018 में दिखाया गया था। लोगों ने तत्काल आवेदन कर दिए। औपचारिकताएं पूरी कर दीं। मगर कॉलोनी का निर्माण साल दर साल आगे बढ़ता गया।
अंबिकापुर। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी सरगवां में अपने आशियाने का सपना लोगों को अब तक पूरा नहीं हुआ। बोर्ड द्वारा कॉलोनी में अपने घर का सपना लोगों को 2018 में दिखाया गया था। लोगों ने तत्काल आवेदन कर दिए। औपचारिकताएं पूरी कर दीं। मगर कॉलोनी का निर्माण साल दर साल आगे बढ़ता गया।
आवेदन के समय 2020 तक निर्माण कार्य पूरा होने का दावा किया गया था। पर हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों की उदासीनता और ठेकेदारों की मनमानी के कारण निर्माण की समय अवधि के 2 साल बाद भी कॉलोनी का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी ठेकेदार पर पूरी तरह से मेहरबान नजर आ रहे हैं। वहीं समय पर मकान का निर्माण पूर्ण नहीं होने के कारण हितग्राहियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अंबिकापुर द्वारा वर्ष 2018 में सरगवां अंबिकापुर में प्रस्तावित अटल बिहार योजना के तहत भवन-फ्लैट हेतु वर्ष 2018 में आवेदन आमंत्रित ेकिए गए थे। योजना के तहत एचआईजी के 14, सीनियर एमआईजी के 12, जूनियर एमआईजी के 40, एलआईजी के 63 व इडब्ल्यूएस के 122 मकान के लिए लोगों ने आवेदन किया था।
हाउसिंग बोर्ड की सारी प्रक्रिया पूर्ण होने पर हितग्राहियों ने अपने-अपने मकान की देय राशि का भी भुगतान कर दिया है। बोर्ड द्वारा वर्ष 2020 में मकान पूर्ण कर हितग्राहियों को हैंडओवर करने का वादा किया गया था। लेकिन वर्ष 2022 तक किसी भी मकान को पूर्ण नहीं किया गया है। आज भी मकान आधे-अधूरे हैं। समय अवधि के दो वर्ष बीतने के बाद भी मकान का निर्माण पूर्ण नहीं होने से हितग्राहियों में रोष है।
बोर्ड के अधिकारी ठेकेदार पर मेहरबान
मकान खरीदना एक बड़ा सपना होता है। लोगों ने इस सपने को पूर्ण करने के लिए लाखों रुपए कर्ज लेकर हाउसिंग बोर्ड कालोनी सरगवां में मकान खरीदा है। लेकिन ठेकेदार की मनमानी व बोर्ड के अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब तक लोगों को मकान का सपना पूर्ण नहीं हो सका है। ठेकेदारों की मनमानी के कारण कॉलोनी निर्माण की गति काफी धीमी चल रही है। इसका खामियाजा हितग्राहियों को भुगतना पड़ रहा है। वहीं हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी ठेकेदार पर मेहरबान बने हुए हैं।
हितग्राहियों को झेलनी पड़ रही दोहरी मार
हाउसिंग बोर्ड सरगवां में बन रहे मकान 6 लाख से 52 लाख तक के हंै। हितग्राहियों ने अपने मेहनत की जमा पूंजी के अलावा लाखों रुपए बैंक से लोन लेकर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में मकान खरीदा है। हितग्राहियों को हर महीने बैंक को ईएमआई पटाना पड़ता है। वहीं इनमें से अधिक हितग्राही ऐसे हैं जिनके पास पूर्व से अपना मकान नहीं है। वे किराए के मकान में रह रहे हैं। ऐसे हितग्राहियों को बैंक की ईएमआई के अलावा घर का किराया पटाना पड़ रहा है। इस बढ़ते महंगाई के दौर में लोगों आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। इसके बावजूद भी बोर्ड मकान का कार्य पूर्ण कराना उचित नहीं समझ रहा है। अगर मकान का निर्माण पूर्ण हो जाता है तो हितग्राहियों के पास किराए का पैसा बचेगा। हाउसिंग बोर्ड की उदासीनता व ठेकेदार की मनमानी के कारण हितग्राहियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
मारपीट की धमकी देते हैं ठेकेदार
समय पर कॉलोनी का निर्माण पूर्ण नहीं होने से हितग्राहियों में रोष है। हितग्राही जब मकान की स्थिति देखने कालोनी में पहुंचते हैं तो पता चलता है कि एक साल पूर्व जो स्थिति थी, मकान उसी हालत में अभी भी है। इस संबंध में हितग्राही जब कॉलोनी के कार्यालय में जाकर बोर्ड के अधिकारियों से निमार्ण पूर्ण होने के संबंध में चर्चा करते हैं तो ठेेकेदार अंबिकापुर निवासी अशोक अग्रवाल का बेटा मारपीट करने पर उतारू हो जाता है। हितग्राहियों को डराया धमकाया जा रहा है। जब इस घटना की जानकरी मौके पर पहुंचे हाउसिंग बोर्ड अंबिकापुर के कार्यपालन अभियंता जीपी प्रजापति को दी गई तो उन्होंने विशेष कुछ नहीं किया। क्योंकि ठेकेदारों के साथ अफसरों की मिलीभगत है।
टीएल मीटिंग में कराता हूं रिव्यू
कलक्टर संजीव कुमार झा सरगुजा से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने बताया कि अब तक हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निर्माण में लेट लतीफी की जानकारी नहीं थी। इसे फॉलोअप कराता हूं। काम पूरा नहीं हो रहा है, इसकी जानकारी नहीं मिली थी, टीएल मीटिंग में इसका रिव्यू करता हूं। साइट का निरीक्षण कराकर कार्य में प्रगति लाने का निर्देश दिया जाएगा। बोर्ड को समय पर कार्य पूर्ण करा देना चाहिए।