अंबिकापुर

Inflation: महंगाई इतनी कि थाली से गायब होती जा रही हरी सब्जियां, किलो की जगह पाव में विक्रेता बता रहे भाव

Inflation in vagetables: अब 500 रुपए में भी सब्जियों से झोला भरना मुश्किल, गोभी 100 रुपए तो आलू-प्याज भी 50 रुपए के करीब, अरहल दाल की कीमत 170-180 रुपए प्रति किलो

2 min read

अंबिकापुर. Inflation: महंगाई के कारण कई घरों में दाल बनना बंद हो गया है। वहीं आमजनों की थाली से हरी सब्जियां के साथ आलू-प्याज भी दूर होती जा रही है। दाल के साथ-साथ हरी सब्जियां व आलू-प्याज भी महंगे हो गए हैं। टमाटर जहां 60 से 80 रुपए किलो बिक रहा है वहीं आलू-प्याज का भाव 40 रुपए प्रति किलो है। इस साल आलू पहली बार इतना महंगा हुआ है। जबकि आलू व प्याज आम लोगों के लिए सस्ती सब्जी माना जाता है। वहीं हरी सब्जियों की बात करें तो कोई भी सब्जी 40 रुपए से कम नहीं है। परवल 60 रुपए किलो बिक रहा है। हरी मिर्च व धनियापत्ती के भाव भी आसमान (Inflation) पर हैं।


महंगाई (Inflation) बढऩे से लोगों की रसोई का स्वाद बिगड़ रहा है। अरहल दाल का भाव 180 के करीब है। दाल महंगी होने के कारण आम लोगों की थाली से दूर हो गया है। वहीं मानसून शुरू होते ही हरी सब्जियां भी महंगी हो गईं हंै।

एक माह के अंदर सब्जियों के भाव में दोगुना वृद्धि हुई है। बारिश शुरू होते ही सब्जियों के उत्पादन में कमी आने के कारण कीमत आसमान छू रही है। सब्जियों के भाव 60 से 80 रुपए किलो (Inflation in vagetables) तक पहुंच गया है।

एक माह पूर्व तक सब्जियों के भाव में कमी देखी जा रही थी। इसलिए 300 से 400 रुपए में दो से तीन दिन की सब्जी मिल जाती थी। अब 500 रुपए भी भी सब्जी पर्याप्त नहीं मिल रहा है। व्यापारी सब्जियों के भाव अब किलो की जगह पाव में बता रहे हैं।

आल-प्याज भी महंगे होने से बढ़ी परेशानी

पिछले कुछ दिनों तक आलू-प्याज 15-20 रुपए प्रति किलो था। अचानक आलू-प्याज के भाव में भी वृद्धि हुई है। आलू-प्याज 40-50 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। इससे आम लोगों को आलू-प्याज की खरीदारी भी परेशान कर रही है। अभी आगामी दिनों में भी यही भाव रहने के आसार हैं।

घर चलाना हुआ मुश्किल

खाद्य पदार्थों की महंगाई बढ़ती जा रही है। चावल, आटा, दाल के साथ सब्जी भी काफी महंगी हो गई है। पहले जहां जिस घर में महीने का 5-6 हजार में राशन आता था, अब उसका बजट 8 से 9 हजार तक पहुंच गया है। वहीं 5 सौ रुपए में सब्जियों से झोला तक नहीं भर पा रहा है।

सब्जियों की खरीद-बिक्री में बिचौलिए भी सक्रिय

खुदरा सब्जी विके्रता संजय ने बताया कि सब्जी का थोक बाजार कंपनी बाजार है। यहां प्रति दिन लोकल व बाहर से सब्जियां आती हंै। वहीं सिलफिली सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में बिचौलिए सक्रिय हैं। ये किसानों से सब्जी खरीदकर बाहर भेज देते है। बिचौलिए सब्जी लेकर मंडी तक नहीं पहुंचते हैं। सब्जी के भाव बढऩे का यह भी एक कारण है।

Published on:
14 Jul 2024 05:22 pm
Also Read
View All

अगली खबर