
अंबिकापुर. स्वास्थ्य विभाग में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को दिए जाने वाले इंसेंटिव भुगतान में अनियमितता की शिकायतों पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) (National Health Mission) ने जांच के निर्देश दिए हैं। एनएचएम के अपर संचालक इंद्रजीत बर्मन ने 7 अक्टूबर को सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) को पत्र जारी कर सीएचओ की कार्यप्रणाली और इंसेंटिव भुगतान की जांच कराने को कहा है। अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई कर जांच प्रतिवेदन राज्य कार्यालय को भेजना अनिवार्य किया गया है। इधर सीएचओ संघ ने पत्र जारी करने पर आपत्ति दर्ज कराते हुए अपनी लंबित मांगों का निराकरण करने की मांग की है। निराकरण नहीं होने पर ऑनलाइन रिपोर्टिंग के अनिश्चितकालीन बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि सीएचओ को प्रतिमाह इंसेंटिव (CHO incentive) का भुगतान किया जाता है। इस भुगतान को लेकर शिकायतें मिल रही हैं कि कई अधिकारी-कर्मचारी मुख्यालय में निवास नहीं करते और अपने मूल पदस्थापना स्थल पर समय से ड्यूटी नहीं पहुंचते। इसके अलावा ऑनलाइन उपस्थिति 50 प्रतिशत से कम रहने, ऑनलाइन कार्य संतोषजनक नहीं होने और ड्यूटी से अनुपस्थित रहने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं।
एनएचएम ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर और उप स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव की संख्या शून्य रहने तथा मातृ-शिशु मृत्यु दर अधिक होने का भी उल्लेख किया है। इन बिंदुओं के आधार पर सभी सीएचओ के इंसेंटिव भुगतान में कथित अनियमितताओं की नियमानुसार जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
इधर छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने जांच संबंधी पत्र पर आपत्ति जताई है। संघ ने पत्र को निरस्त या संशोधित करने और अपनी लंबित मांगों का निराकरण करने की मांग की है। संघ का कहना है कि इंसेंटिव भुगतान की जांच पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। भुगतान संबंधी अनियमितताओं की जांच के नाम पर सीएचओ से जुड़े अन्य मुद्दों को जोडऩा उचित नहीं है।
संघ ने चेतावनी दी है कि मांगों का निराकरण नहीं होने पर 15 अक्टूबर से प्रदेशभर के सीएचओ ऑनलाइन रिपोर्टिंग कार्य का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करेंगे। संघ के अनुसार, इस संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अधिकारियों को पहले भी पत्र सौंपे गए हैं। 12 अक्टूबर को भी अंतिम सूचना भेजकर कार्रवाई की मांग की गई है। निर्धारित समय सीमा में मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन शुरू करने की बात कही गई है।