
Ambikapur DMF Scam, अंबिकापुर कोर्ट ने ही एफआईआर के दिए हैं निर्देश (Photo- Patrika)
अंबिकापुर। केशवपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद (DMF Scam) से स्वीकृत 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपए की राशि में कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में न्यायालय ने पूर्व जनपद सीईओ, इंजीनियर, सरपंच-सचिव समेत 9 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने सिटी कोतवाली थाना प्रभारी को प्रकरण दर्ज कर विवेचना करने और नियमानुसार आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
न्यायालय ने आरटीआई कार्यकर्ता अभय नारायण पांडेय की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत प्रस्तुत आवेदन स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया है। मामले में तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ, उप अभियंता, तत्कालीन लिपिक, पंचायत सचिव-सरपंच और संबंधित निर्माण फर्मों से जुड़े लोगों के नाम शामिल हैं।
बता दें कि 31 मार्च 2023 को कॉलेज परिसर (Atmanand College Campus) में 3 निर्माण एवं नवीनीकरण कार्यों के लिए प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई थी। इनमें गार्डन सौंदर्यीकरण और सीसी रोड निर्माण के लिए 33.24 लाख रुपए, प्रथम तल पर प्रयोगशाला, पुस्तकालय के नवीनीकरण और आहाता निर्माण के लिए 49.57 लाख रुपए तथा भूतल पर प्राचार्य कक्ष, कार्यालय नवीनीकरण और पार्किंग शेड के लिए 49.52 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। इन कार्यों के लिए ग्राम पंचायत केशवपुर को निर्माण एजेंसी बनाया गया था।
आवेदक का आरोप है कि तत्कालीन अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए खुली निविदा प्रक्रिया के बिना मेसर्स अनन्या कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स और मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स को भुगतान कराया। राशि आरटीजीएस और चेक के माध्यम से हस्तांतरित किए जाने की बात भी आवेदन में कही गई है।
आवेदन के अनुसार शासकीय दस्तावेजों में स्मृति कंस्ट्रक्शन (Smriti Construction) के नाम पर दर्ज मोबाइल नंबर तत्कालीन उप अभियंता विवेक प्रताप सिंह राठौर का था। वहीं सरपंच-सचिव ने अपने बयानों में अधिकारियों के दबाव में निर्माण एजेंसी के रूप में हस्ताक्षर करने की बात कही। ठेकेदारों की ओर से वैध बिल-वाउचर प्रस्तुत नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
मामले की शिकायत तत्कालीन जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने जिला प्रशासन से की थी। इसके बाद कलेक्टर ने 4 सदस्यीय जांच टीम गठित की। जांच रिपोर्ट में स्वीकृत प्राक्कलन और तकनीकी नियमों के अनुरूप काम नहीं होने तथा वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आने का उल्लेख है।
न्यायालय ने आरोपित लोकसेवकों को भारतीय दंड संहिता की धारा 197 के तहत अभियोजन से संरक्षण देने का तर्क स्वीकार नहीं किया। न्यायालय के अनुसार पद का दुरुपयोग कर कथित आपराधिक साजिश और वित्तीय धोखाधड़ी (Fraud) को शासकीय कर्तव्य का हिस्सा नहीं माना जा सकता।
न्यायालय (Ambikapur Court) के आदेश में तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ सुरेश्वर नाथ तिवारी, उप अभियंता विवेक प्रताप सिंह राठौर, तत्कालीन प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी एवं वर्तमान उप अभियंता उपेंद्र सिंह सेंगर, तत्कालीन लिपिक शैलेंद्र मिश्र, तत्कालीन पंचायत सचिव राम प्रकाश यादव, तत्कालीन सरपंच इम्तान सिंह, व्यवसायी सुयश अग्रवाल, अरविंद कुमार अग्रवाल तथा संबंधित निर्माण फर्म के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
प्रकरण में आपराधिक साजिश, शासकीय राशि के कथित गबन, धोखाधड़ी और दस्तावेजों में जालसाजी सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, कलेक्टर की जांच के लिए गठित 4 सदस्यीय दल के अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय ने इस मामले में अपराध बनना नहीं माना।
आवेदन में यह तथ्य भी सामने आया कि उप अभियंता विवेक प्रताप सिंह राठौर और उपेंद्र सिंह सेंगर के खिलाफ 28 मार्च 2025 को न्यायालय के आदेश पर एक अन्य भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। अब डीएमएफ राशि से जुड़े इस मामले में पुलिस की विवेचना के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
Updated on:
13 Oct 2026 07:47 pm
Published on:
13 Oct 2026 07:47 pm
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