
अंबिकापुर। सरगुजा ओलंपिक का आयोजन अंबिकापुर में किया गया। लेकिन बदइंतजामी से खिलाडिय़ों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। गुरुवार की रात ऐसा ही कुछ देखने को मिला। जिला स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने अंबिकापुर पहुंचे सीतापुर ब्लॉक के 45 से अधिक खिलाड़ी रात में घंटों तक गांधी स्टेडियम (Ambikapur Gandhi Stadium) के बाहर बस का इंतजार करते रहे। प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद शाम 4 बजे उन्हें लौटना था, लेकिन रात 11 बजे तक बस नहीं पहुंची। इस दौरान खिलाड़ी भूखे-प्यासे ठंड में परेशान होते रहे, लेकिन मौके पर उनकी सुध लेने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी या आयोजन प्रभारी मौजूद नहीं था। अंत में सीतापुर विधायक की पहल पर रात 12 बजे बस पहुंची और खिलाडिय़ों को लेकर गई।
सीतापुर के खो-खो समेत अन्य इवेंट के 45 से अधिक खिलाड़ी बदइंतजामी से परेशान रहे। शाम 4 बजे से शहर के गांधी स्टेडियम में बस का इंतजार करते रहे। इस दौरान उन्हें न तो किसी ने रुकने की व्यवस्था दी और न ही खाने को कहा। अंतत: परेशान महिला-पुरुष खिलाडिय़ों ने रात करीब 11 बजे सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो (Sitapur MLA Ramkumar Toppo) को फोन कर अपनी समस्या बताई।
विधायक ने तत्काल सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से बात की और खिलाडिय़ों की स्थिति से अवगत कराया। कलेक्टर के निर्देश पर जिला पंचायत सीईओ रोमा श्रीवास्तव गांधी स्टेडियम पहुंचीं। उन्होंने खिलाडिय़ों के भोजन की व्यवस्था कराई और दूसरी बस बुलवाकर उन्हें सीतापुर भेजने का इंतजाम किया। इसके बाद रात करीब 12 बजे खिलाड़ी अपने घरों के लिए रवाना हो सके।
सरगुजा ओलंपिक की जिला स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल होने सीतापुर ब्लॉक से 45 से अधिक खिलाड़ी अंबिकापुर पहुंचे थे। इनमें छात्र-छात्राएं भी शामिल थे। गुरुवार को प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद सभी खिलाडिय़ों को शाम 4 बजे वापस सीतापुर भेजने की व्यवस्था की गई थी। खिलाड़ी निर्धारित समय पर गांधी स्टेडियम पहुंचकर बस का इंतजार (Players bus) करने लगे, लेकिन घंटों बीतने के बाद भी वाहन नहीं पहुंचा।
बताया गया कि बस ब्रेकडाउन हो गई, इस वजह से नहीं पहुंची, जबकि इसकी जानकारी भी खिलाडिय़ों को नहीं दी गई थी। शाम से रात होने के बाद भी व्यवस्था संभालने वाले जिम्मेदार अधिकारी और प्रभारी मौके पर नहीं पहुंचे। अंतत: खिलाडिय़ों को खुद ही मदद के लिए विधायक को वीडियो कॉल करना पड़ा।
सरगुजा ओलंपिक के ब्लॉक और जिला स्तरीय आयोजन के लिए लाखों रुपए की राशि खर्च की गई। जिला स्तरीय प्रतियोगिता में करीब 1800 खिलाड़ी शामिल हुए। इसके बावजूद खिलाडिय़ों के भोजन, परिवहन और सुरक्षित वापसी जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं में लापरवाही सामने आई। सीतापुर के खिलाडिय़ों को रात तक स्टेडियम (Gandhi stadium) के बाहर इंतजार करना पड़ा। इस घटना ने आयोजन की व्यवस्थाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।