सरगुजा विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा परिणाम घोषित करने में की जा रही देरी को लेकर मिलने पहुंचे थे छात्र नेता
अंबिकापुर. परीक्षा परिणाम घोषित करने में हो रही लेट-लतीफी व इसकी वजह से प्रवेश में हो रही देरी को लेकर एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय में पहुंच विरोध प्रदर्शन किया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच छात्र संगठन के पदाधिकारी मुख्य गेट को तोड़कर कुलपति के कक्ष तक पहुंच गए। इधर कुलपति ने अधिकारियों के कहने पर भी मिलने से इनकार कर दिया तो स्थिति बिगड़ गई।
इसके बाद छात्र संगठन के पदाधिकारियों ने कपड़ा उतारकर बेशर्म आंदोलन किया। बाद में प्रशासन व पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह मामला शांत हुआ और कुलसचिव ने छात्र संगठनों की मांग पर जल्द कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रोहिणी प्रसाद छात्र हित से ज्यादा प्रशासनिक हित पर काम करने में विश्वास रखते हैं। जब भी कोई छात्र अथवा संगठन छात्र हित की समस्याओं को लेकर आंदोलन करता है अथवा उनसे मिलने का प्रयास करता है तो वे उससे मिलने से इनकार कर देते हैं।
बुधवार को सरगुजा विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न विषयों का परीक्षा परिणाम घोषित करने में की जा रही देरी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा के नेतृत्व में सतीश बारी, हिमांशु जायसवाल, स्वपनिल जायसवाल, राजेश गुप्ता, भावेश शुक्ला, आतिफ रजा, राहूल सहित अन्य कार्यकर्ता विश्वविद्यालय पहुंचे।
इसकी जानकारी लगते ही पहले से ही वहां कोतवाली टीआई के नेतृत्व में पुलिस बल खड़ी थी। लेकिन छात्र संगठन के पदाधिकारी मुख्य गेट को धकलते हुए विश्वविद्यालय परिसर के अंदर प्रवेश कर गए।
इस दौरान उन्होंने कुलपति के कक्ष में प्रवेश कर जमकर नारेबाजी की। इसकी जानकारी लगते ही एसडीएम अजय त्रिपाठी व सीएसपी आरएन यादव भी विश्वविद्यालय पहुंच गए। उन्होंने पहले छात्रों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन कुलपति से मिलने की मांग पर छात्र संगठन के पदाधिकारी डटे हुए थे।
मिलने से किया इंकार तो बिगड़ी स्थिति
कुलपति द्वारा मिलने से इंकार किए जाने पर कार्यकर्ताओं ने कपड़ा उतारकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। आकाश शर्मा ने कहा किकुलपति ने बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी हैं और छात्रों तक से मिलने से इनकार कर दिया है।
इसकी वजह से हमें भी बेशर्म होकर आंदोलन करना पड़ा। फिर कुलसचिव विनोद एक्का नेे मुलाकात कर उनकी समस्याओं को जाना और जल्द ही उसे पूरा करने का आश्वासन दिया। इसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ।