Water crisis in Mainpat: जल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण करने कलेक्टर ने की पहल, सीएम के निर्देश पर डीएमएफ मद से हैंडपंप व बोरवेल लगाने का लिया फैसला
अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम से विख्यात मैनपाट क्षेत्र के 100 बस्तियों में निवासरत करीब 100 आदिवासी परिवारों के लोग आज भी नदी-नालों का गंदा पानी (Water crisis in Mainpat) पीने का विवश हैं। पेयजल की उपलब्धता नहीं होने की वजह से ये परिवार ढोढ़ी व नदी-नालों के दूषित पानी से गुजारा कर रहे हैं। यह मामला सामने आते ही मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत को फोन लगाकर कहा कि इन बस्तियों में तत्काल पेयजल की व्यवस्था करें।
सीएम का निर्देश मिलते ही कलेक्टर द्वारा ऐसे बस्तियों का परीक्षण कराया गया। इसें पाया गया कि मैनपाट क्षेत्र में करीब 100 ऐसे बस्ती हैं, जहां पीने का स्वच्छ पानी (Water crisis in Mainpat) नहीं है। ऐस में अब कलेक्टर द्वारा इन बस्तियों में डीएमएफ मद से परीक्षण में हैंडपंप व बोरवेल लगाए जाएंगे।
बता दें कि मैनपाट के सपनादर ग्राम पंचायत के केराजेबला बस्ती में ग्रामीण नाला का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। पीएचई विभाग की लापरवाही के चलते स्थिति गंभीर हो गई, जिसके बाद मामला (Water crisis in Mainpat) सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचा।
कलेक्टर अजीत वसंत ने बताया कि जिले के दूरस्थ इलाकों में पेयजल समस्या (Water crisis in Mainpat) की जांच कराई गई, जिसमें 100 से अधिक बस्तियों में संकट पाया गया। डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) मद से इन बस्तियों में हैंडपंप स्थापित करने की स्वीकृति दे दी गई है।
कलेक्टर ने कहा कि अगले 3 से 4 दिनों के भीतर बोरवेल खनन कर हैंडपंप लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। प्राथमिकता उन बस्तियों को दी जा रही है जहां लोग अभी भी नदी, नाला या खेतों का पानी (Water crisis in Mainpat) पी रहे हैं। बता दें कि दूषित पानी पीने के कारण ग्रामीणों में बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जिससे पेयजल संकट गहराता है।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अब प्रशासन पर त्वरित कार्रवाई का दबाव है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही प्रभावित बस्तियों में साफ पेयजल (Water crisis in Mainpat) उपलब्ध कराया जाएगा। इससे आदिवासी परिवारों को दूषित जल की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है।