अंबिकापुर

ये Video बयां कर रहा वन अफसरों की तस्करों से साठगांठ, जब जंगल ही कट जा रहे तो किस काम का लेते हैं वेतन

Wood smuggling: प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के जंगल में बेहिसाब हो रही पेड़ों की कटाई, जंगल (Forest) में ही बनाए जा रहे पटरे, हाथी प्रभावित क्षेत्र (Elephants effected area) कहकर तस्करों (Smugglers) को वन अफसरों ने दे दी है खुली छूट

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Trees cut in forest

अंबिकापुर. सूरजपुर जिले का प्रतापपुर वन परिक्षेत्र हाथी प्रभावित रहा है। इसका पूरा फायदा उक्त क्षेत्र में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारी उठा रहे हैं। वन परिक्षेत्र में धड़ल्ले से तस्करों द्वारा बेहिसाब पेड़ों की कटाई (Wood smuggling) की जा रही है। पत्रिका के हाथ जो वीडियो लगा है वह अफसरों की तस्करों के साथ साठगांठ की पोल खोलने के लिए काफी है।

जंगल के मुख्य मार्ग से लगे पेड़ों की कटाई कर पटरे बनाए जा रहे हैं। ऐसा संभव ही नहीं है कि वन अधिकारियों-कर्मचारियों को इसकी जानकारी न हो, इसके बावजूद शासन को चपत लगाने का खुला खेल चल रहा है।

सवाल ये उठता है कि जंगल की सुरक्षा, हाथियों की सुरक्षा करने के लिए इन वन अफसरों-कर्मचारियों को शासन हर माह मोटा वेतन देता है, जब वे इनकी सुरक्षा में नाकाम हैं तो किस काम का वेतन सरकार से लेते हैं।

पेड़ों की कटाई की शिकायत सीएफ से की गई है, उन्होंने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के लिए टीम का गठन किया है।

गौरतलब है कि प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के धरमपुर सर्किल के केराडांड-सिंघरा मार्ग के गर्जन डीह बीट में सैकड़ों विशाल पेडों को काट कर खुलेआम पटरा, चौखट और कंडी निकाल कर तस्करी (Smuggling) की जा रही है। वहीं वन विभाग (Forest department) के अधिकारियों की इस मामले में चुप्पी ने उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में से वन विभाग (Forest department) की हाथी विभाग वाली गाड़ी रोज भर्मण कर लोगों को हाथी के बारे में जानकारी प्रदान करती है। वहीं सडक़ के किनारे काटे गए पेड़ इन्हें नहीं दिखते हैं।

ये बिना विभाग की तस्करों से मिलीभगत के संभव ही नही है। प्रतापपुर रेंज में नए रेंजर की पदस्थापना के बाद से हाथियों की मौत व पेड़ों की बेहिसाब कटाई जारी है।


बीट प्रभारी की कार्यशैली संदिग्ध
प्रतापपुर वन विभाग के धरमपुर सर्किल के गर्जन डीह बिट में पहले भी पेड़ों की कटाई (Trees cut) का मामला सामने आया था, इसके बाद भी विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों से पूछने पर यही बोला जाता है कि अभी जांच चल रही है। जबकि यह हाथी प्रभावित क्षेत्र है और बीट प्रभारी का यहां आना-जाना रहता है।

उनके ही क्षेत्र में पेड़ों की कटाई से उनकी कार्यशैली संदिग्ध नजर आती है। तस्करों के साथ इनकी मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।


सीएफ ने जांच के लिए किया टीम का गठन
पत्रिका द्वारा मामले की शिकायत सरगुजा वृत्त के मुख्य वन संरक्षण अधिकारी एबी मिंज से की गई। इस पर उन्होंने कहा कि मुझे आपके द्वारा जानकारी मिली हैं। उन्होंने मामले की जांच के लिए एक टीम का गठन किया है। उन्होंने बताया कि जांच पश्चात दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।


उडऩदस्ता टीम ने जब्त किए कटे पेड़-पटरे
मामले की शिकायत के बाद सोमवार की दोपहर वन विभाग की उडऩदस्ता टीम गर्जनडीह बीट के जंगल में पहुंची और तस्करों द्वारा काटे गए पेड़ व उनके द्वारा बनाए गए पटरे को जब्त किया। शिकायत से पूर्व ये भी मौन बैठे थे।

Published on:
28 Sept 2020 04:14 pm
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