मोदी सरकार ने बड़ी कूटनीतिक सफलता प्राप्त की है। अब अमरीका एच-1 बी वीजा में कोई बदलाव नहीं करेगा।
वाशिंगटनः एच-1 बी वीजा पर पर जारी विवाद के बाद अमरीका अब भारत के दवाब में झुकता नजर आ रहा है। नई दिल्ली में होने वाली टू प्लस टू मीटिंग से पहले अमरीका की तरफ से कहा गया है कि एच-1 बी वीजा जारी करने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। दरअसल छह सितंबर को भारत और अमरीका के बीच टू प्लस टू बैठक होने जा रही है। इस बैठक में संभावना थी कि भारत इस मुद्दे को उठा सकता है। इसीलिए बैठक से पहले ही अमरीका ने यह साफ कर दिया है कि एच-1 बी वीजा को लेकर कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है।
वीजा कार्यक्रमों की हो रही समीक्षा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वीजा कार्यक्रमों की समीक्षा करने का निर्देश दिया हुआ है। लेकिन अभी तक एच-1 बी वीजा जारी करने की प्रक्रिया में बदलाव नहीं हुआ है। अधिकारी ने कहा कि अभी कहना मुश्किल है कि एच-1 बी में कोई बदलाव होगा।
क्या है एच -1बी वीजा ?
यह वीजा गैर-प्रवासी वीजा है जो किसी भी कर्मचारी को अमरीका में काम करने के लिए जारी किया जाता है। इसकी वैधता छह साल तक होती है। इस वीजा को पाने वाली विदेशी कर्मचारी की सेलरी न्यूनतम 40 लाख रुपए सालाना होना जरूरी है। इस वीजा को प्राप्त करने वाले शख्स को स्नातक होने के साथ किसी एक क्षेत्र में विशेष योग्यता भी हासिल करना जरुरी होता है। वीजा नियमों में सख्ती के बाद विदेशी लोगों का अमरीका के प्रति आकर्षण कम हो जाएगा। बताया जा रहा है कि साल 2010 से 2016 के बीच एच-1 बी वीजा धारकों को अमरीका के टैक्सास समेत कई शहरों में रोजगार के सबसे अधिक मौके मिले हैं लेकिन इस वीजा के लागू होने से विदेशी लोगों को यहां पर नौकरी करना आसान नहीं होगा।