अमरीका

मध्यावधि चुनाव: क्या हैं डोनाल्ड ट्रंप की हार के मायने, किन मुश्किलों का सामना करेंगे अमरीकी राष्ट्रपति

कहा जा रहा है कि ये परिणाम अमरीका में सत्ता संतुलन स्थापित करने वाले हैं

3 min read
मध्यावधि चुनाव: क्या हैं डोनाल्ड ट्रंप की हार के मायने, किन मुश्किलों का सामना करेंगे अमरीकी राष्ट्रपति

वाशिंगटन। अमरीका में हुए मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमरीकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जीत हासिल कर ली है। इन नतीजों से अमरीका की रजनीति में हलचल मच गई है। इन नतीजों ने कई समीकरण बदलकर रख दिए हैं। अभी तक राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का दोनों सदनों में बहुमत था। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी का अभी भी सीनेट में बहुमत है, लेकिन निचले सदन में उनकी पार्टी ने बहुमत खो दिया है। अमरीकी कांग्रेस में प्रतिनिधि सभा हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की कुल 435 सीटों में से डेमोक्रेटिक पार्टी ने 245 सीटें जीती हैं। जबकि रिपब्लिकन पार्टी को सीनेट में कुल 100 सीटों में से अब 54 सीटें मिल गई हैं।

क्या हैं इन नतीजों के मायने

ये भी पढ़ें

फ्रांस में पुतिन, ट्रंप और जर्मनी की चांसलर से मिले उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू

मध्यावधि चुनाव के नतीजों से ट्रंप के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। नतीजों का विश्लेषण करने के बाद चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि ये परिणाम अमरीका में सत्ता संतुलन स्थापित करने वाले हैं। 2016 में चुनाव के बाद से ट्रंप दोनों सदनों में बहुमत में थे और उन्होंने अमरीका पर खुलकर राज किया है। उन्होंने जो चाहा वो कानून पास किया। उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था। अब उनके सामने मुश्किलों का अंबार लग सकता है। ट्रंप के सामने जो सबसे पहला खतरा है, वह यह है कि राष्ट्रपति चुनाव में रूस की दखलअंदाज़ी के मामले की जांच अब शुरू हो सकती है। डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता नैंसी पलोसी प्रतिनिधि सभा में स्पीकर का पद संभाल सकती हैं।

ट्रंप की चुनौतियां

राष्ट्रपति ट्रंप के सामने सबसे पहली चुनौती यह है कि डेमोक्रेट्स उनके काम का कच्चा चिट्ठा खोल सकते हैं। डेमोक्रेट्स सबसे पहले उनके प्रशासनिक कामकाज की छानबीन करने की तैयारी करते दिख रहे हैं। पहले ही अमरीकी प्रतिनिधि सभा की खुफिया समिति 2016 के चुनावों में रूस के कथित हस्तक्षेप की जांच कर रही है। ट्रंप के कटटर विरोधी माने जाने वाले एडम शिफ इसके अध्यक्ष के हाथों में है। अब डेमोक्रेटिक पार्टी के निचले सदन में बहुमत में आने से इस जांच में और तेजी आ सकती है। अमरीकी समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट की एक रपट के मुताबिक डेमोक्रेटिक पार्टी ट्रंप के खिलाफ महाभियोग भी ला सकती है। हालांकि जानकारों की मानें तो डेमोक्रेट्स की रूचि महाभियोग से अधिक ट्रंप को प्रशासनिक रूप से पंगु बनाने में हैं।

कैसे बनेगी मेक्सिको सीमा पर दीवार

ट्रंप के सामने जो दूसरी चनौती डेमोक्रेट्स खड़ी कर सकते हैं, वह है मेक्सिको की सीमा पर दीवार बनाना। बता दें कि यह 2016 के चुनावी अभियान में किया गया ट्रंप का वादा भी है। अरबों डॉलर के इस प्रोजेक्ट की डेमोक्रेटिक पार्टी कटु आलोचक रही है। अब निचले सदन में बहुमत गंवाने की वजह से ट्रंप के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर सहमति बनाना बेहद मुश्किल होगा।

ओबामाकेयर का भविष्य

ओबामाकेयर पिछली डेमोक्रेटिक सरकार द्वारा शुरू की गई एक ऐसी योजना है जिसे बंद करने का सपना ट्रंप बहुत दिनों से देख रहे हैं। लेकिब अब सदन में बदले बहुमत के गणित के बाद के बाद ट्रंप का यह काम और भी मुश्किल होने वाला है।

अप्रवासी और नागरिकता कानून

अप्रवासियों को उनके देश वापस भेजना ट्रंप की एक ऐसी योजना है जिसे डेमोक्रेटिक पार्टी के चले सदन में आने के बाद वापस लेना पड़ेगा। ट्रंप प्रशासन ने पिछले दो साल में अप्रवासियों से संबंधित कई कानून लगू करने का प्रयास किया है। बता दें कि ट्रंप अप्रवासियों को लेकर जितने कठोर हैं, डेमोक्रेटिक पार्टी का रवैया इस बारे में उतना ही लचीला है। डेमोक्रेट्स के हाउस ऑफ़ रिप्रजेंटेटिव में बहुमत में आने से इन प्रस्तावों के आगे बढ़ने की संभावना लगभग शून्य हो गई है। अपने बहु प्रतीक्षित नागरिकता कानून को लकेर ट्रंप को अपने कदम पीछे खींचने पड़ सकते हैं। बता दें कि ट्रंप अमरीका के जन्मजात नागरिकता संबंधी कानून को ख़त्म करने के लिए एक विशेष अध्यादेश लाने की बात कह चुके हैं। इसके अलावा टैक्स में कटौती एक ऐसा मुद्दा है जिस पर ट्रंप को डेमोक्रेट्स सदस्यों को मानना बेहद मुश्किल होगा।

ये भी पढ़ें

अमरीका ने युद्ध ग्रस्त यमन में विमानों की रिफिलिंग समाप्त की, सऊदी अरब पर बढ़ा दबाव
Published on:
12 Nov 2018 10:54 am
Also Read
View All