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अमरीका ने युद्ध ग्रस्त यमन में विमानों की रिफिलिंग समाप्त की, सऊदी अरब पर बढ़ा दबाव

इस बात की संभावना जताई जा रही है कि तुर्की स्थित वाणिज्य दूतावास में 2 अक्टूबर को पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के शक में सऊदी अरब संभावित प्रतिबंधों का सामना कर सकता है।

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अमरीका ने युद्ध ग्रस्त यमन में विमानों की रिफिलिंग समाप्त की, सऊदी अरब पर बढ़ा दबाव

न्यूयार्क। सऊदी अरब और संयुक्त राज्य अमरीका ने यमन के उन विमानों की रिफिलिंग को बंद करने का निर्णय किया है जो कि सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमन के हौथी विद्रोहियों के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है। इस निर्णय ने यमन को अकाल के कगार पर धकेलने वाले एक विभाजक पहलू पर विराम लगा दिया है। शनिवार को अमरीका और सऊदी के इस निर्णय की वाशिंगटन द्वारा पुष्टि की गई। ये फैसला ऐसे समय में आया है जब यमन हवाई हमले में नागरिकों की मौत की पहले से ही जांच की जा रही है। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि तुर्की स्थित वाणिज्य दूतावास में 2 अक्टूबर को पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के शक में सऊदी अरब संभावित प्रतिबंधों का सामना कर सकता है।

अमरीका का ऐतिहासिक निर्णय

पिछले महीने संयुक्त राज्य अमरीका और ब्रिटेन ने यमन में लगभग चार साल के लंबे युद्ध को खत्म करने के संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाले प्रयासों का समर्थन करने के लिए यमन में युद्धविराम की मांग की थी। बता दें कि इसमें जिसमें 10,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और इस युद्ध ने दुनिया के सबसे बड़े मानवतावादी संकट को जन्म दिया है। अब अमरीकी प्रशासन द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि 'हाल ही में अमरीका और सऊदी गठबंधन ने यमन में स्वतंत्र रूप से सह्न्ति के प्रयासों को बढ़ावा देने की अपनी क्षमता में वृद्धि की है। जिसके परिणामस्वरूप संयुक्त राज्य अमरीका के परामर्श से गठबंधन ने यमन में विमानों की रिफिलिंग को समाप्त करने का फैसला किया है। सऊदी स्वामित्व वाले अल अरबिया अल-हदाथ चैनल के हवाले से बताया गया कि अरब के पास यमन के लिए इस्तेमाल होने वाले छह एयरबस 330 एमआरटीटी सहित 23 विमानों का बेड़ा है।

यमन में शांति स्थापना के प्रयास

अमरीकी रक्षा सचिव जिम मैटिस ने कहा कि अमरीकी सरकार से इस फैसले पर व्यापक परामर्श किया गया था। जिसके बाद वाशिंगटन ने नागरिकों की मौत को कम करने और मानवीय प्रयासों को बढ़ाने के लिए गठबंधन के साथ काम करते हुए इस कदम का समर्थन किया था। माना जा रहा है कि ये फैसला सऊदी अरब और ईरान के बीच प्रॉक्सी युद्ध के रूप चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए एक व्यावहारिक कदम साबित हो सकता है। बता दें कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेतृत्व में सुन्नी मुस्लिम गठबंधन ने हाल ही में ईरानी-गठबंधन और हौथी आंदोलन के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया हुआ है।

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