
वाशिंगटन : पाकिस्तान के खिलाफ भारत और अमरीका के संयुक्त प्रयास को उस वक्त एक बड़ी कामयाबी मिली, जब आंतकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग मामले पर नजर रखने वाली एजेंसी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान को उन देशों की सूची में डाल दिया, जो आंतकवाद को बढ़ावा देने के हिमायती हैं। मालूम हो कि इससे पहले 2012 में भी पाकिस्तान को इस सूची में डाला गया था।
पहले तीन महीने का दिया था वक्त
कुछ ही दिन पहले FATF ने पाकिस्तान को अपने ऊपर लग रहे इन आरोपों सफाई का मौका दिया था। उसने कहा था कि इस मुद्दे पर वह तीन महीने के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करे। पिछले तीन दिनों से पेरिस में FATF की मीटिंग चल रही है। इस दौरान अमरीका ने पाकिस्तान को अंतराष्ट्रीय आंतकवाद की फंडिंग करने के लिए ब्लैक सूची में डालने की बात रखी थी। लेकिन पाकिस्तान इस मुद्दे पर तीन देशों चीन, तुर्की और सऊदी अरब का समर्थन हासिल करने में कामयाबा हो गया था। इसके बाद FATF ने पाक को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए तीन महीने का वक्त दिया था।
विशेषज्ञ बैठक से पहले ही ऐसी उम्मीद जता रहे थे
इस बैठक से पहले ही विशेषज्ञ यह उम्मीद जता रहे थे कि पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। मालूम हो कि अमरीका ने मीटिंग में इस आशय का प्रस्ताव रखा। FATF ने इसे मान लिया है। हालांकि FATF का यह फैसला तब आया, जब अमरीका राष्ट्रपति डोलाल्ड ट्रम्प पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के खिलाफ उठाए कदम से संतुष्ट नहीं दिखे। इस मुद्दे पर अमरीका ने एक बयान भी जारी किया। उसने कहा कि अमरीका पाकिस्तान के कामों की जवाबदेही तय कर रहा है।
अमरीका ने जताई थी पाक कार्रवाई पर नाखुशी
अमरीकी राष्ट्रपति ने साल की वर्ष की शुरुआत में पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य सहायता पर रोक लगा दी थी। उसने कहा था कि वह लश्कर-ए-तैयबा के चीफ आतंकी हाफिज सईद पर पाकिस्तान के कार्रवाई न करने से नाखुश हैं। मालूम हो कि हाफिज सईद मुंबई हमले का मास्टर मांइड है। सईद पर एक करोड़ रुपए का इनाम भी घोषित है।