4 नवंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

US Midterm में भारतीय मूल की पिया दांडिया ने रचा इतिहास, फ्लोरिडा से अमेरिकी संसद पहुंचने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बनीं

अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल की डेमोक्रेट उम्मीदवार पिया दांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है। इस जीत के साथ वह फ्लोरिडा से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बन गई हैं।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Anand Shekhar

•

Updated: 4 Nov 2026, 8:56 AM IST

US Midterm Elections

पिया दांडिया (फोटो- pia dandia for congress)

US Midterm Elections: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया डंडिया ने एक बड़ी जीत हासिल की है। CBS न्यूज के प्रोजेक्शन के अनुसार, उन्होंने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराया है। इस जीत के साथ ही पिया फ्लोरिडा से अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बन गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने वाली 10वीं भारतीय-अमेरिकी भी हैं।

स्कूल प्रिंसिपल से लेकर व्हाइट हाउस फेलो तक का सफर

पाम बीच काउंटी में भारतीय मूल के माता-पिता के घर पली-बढ़ीं पिया डंडिया का राजनीतिक सफर जनसेवा और शैक्षिक सुधारों से जुड़ा रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की और बाद में न्यूयॉर्क के हार्लेम में एक हाई स्कूल की प्रिंसिपल रहीं। इसके अलावा, उन्होंने व्हाइट हाउस फेलो के रूप में भी काम किया है और टेक दिग्गज कंपनी एप्पल के साथ भी जुड़ी रही हैं। अपने चुनाव प्रचार के दौरान, उन्होंने मुख्य रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कॉस्ट ऑफ लिविंग और सभी के लिए आर्थिक अवसरों के विस्तार पर जोर दिया, जिसने दक्षिण फ्लोरिडा के मतदाताओं को गहराई से प्रभावित किया।

रीडिस्ट्रिक्टिंग के बाद बनी नई सीट पर डेमोक्रेट्स की बड़ी कामयाबी

पिया डंडिया फ्लोरिडा के नवनिर्मित 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करेंगी, जिसमें पाम बीच, ब्रोवार्ड, हेनरी और कोलियर काउंटी के कुछ हिस्से शामिल हैं। गौरतलब है कि मध्यावधि चुनाव से ठीक पहले फ्लोरिडा के रिपब्लिकन गवर्नर रॉन डेसेंटिस द्वारा शुरू की गई कांग्रेसनल रीडिस्ट्रिक्टिंग प्रक्रिया के तहत इस सीट की रूपरेखा फिर से तय की गई थीं। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे रिपब्लिकन-झुकाव वाली सीट माना था, लेकिन पिया डंडिया ने जमीनी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करके इसे डेमोक्रेटिक खेमे में लाने में सफलता हासिल की।

वर्जीनिया में सुहास सुब्रमण्यम की निर्णायक जीत

भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक नेता सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में शानदार जीत हासिल करते हुए फिर से चुनाव जीत लिया है। सुब्रमण्यम को कुल 1,73,106 वोट यानी 63.16 प्रतिशत मत हासिल हुए। उन्होंने अपने निकटतम रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी डेव टी. बेकविथ को बड़े अंतर से हराया, जिन्हें 94,990 वोट (34.66%) मिले। निर्दलीय उम्मीदवार अहसान मुजीब मलिक 1.99% (5,444 वोट) पाकर तीसरे स्थान पर रहे। अपनी इस शानदार जीत के बाद, सुब्रमण्यम ने कहा कि यह परिणाम जनता के भरोसे और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की जीत है।

मैरीलैंड में अरुणा मिलर ने अपना पद बरकरार रखा

मैरीलैंड राज्य में भी भारतीय-अमेरिकी समुदाय को सफलता मिली, यहां अरुणा मिलर ने लेफ्टिनेंट गवर्नर का पद दोबारा सुरक्षित कर लिया। डेमोक्रेटिक गवर्नर वेस मूर के साथ चुनाव लड़ते हुए मिलर ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब क्रुटेनडेन और डैन कॉक्स की जोड़ी को हराया। इस जीत से अमेरिका में राज्य स्तर के सबसे ऊंचे कार्यकारी पदों में से एक पर भारतीय-अमेरिकी नेतृत्व की मौजूदगी बनी रहेगी। मिलर ने परिवहन, मानसिक स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे क्षेत्रों में अपने काम के लिए काफी लोकप्रियता हासिल की है।

मिडटर्म चुनावों में भारतीय-अमेरिकी नेताओं पर नजर

इस मिडटर्म चुनाव में कई प्रमुख भारतीय-अमेरिकी चेहरे पर लोगों की नजरें टिकी हैं। कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक नेता रो खन्ना और अमी बेरा, टेक्सास से पूजा सेठी और नॉर्थ कैरोलिना से रिपब्लिकन उम्मीदवार महेश गनोर्कर के लिए चुनाव परिणाम और शुरुआती रुझान सामने आ रहे हैं। इसके अलावा, सबकी नजरें रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी पर भी टिकी हैं, जो ओहियो के गवर्नर पद की दौड़ में शामिल हैं।

हाउस में डेमोक्रेट्स को बढ़त

डिसीजन डेस्क HQ के अनुमानों के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी ने मध्यावधि चुनावों में निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है, जिससे वह हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत पाने की स्थिति में आ गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के ठीक दो साल पूरे होने पर हुए इन चुनावों को उनकी नीतियों पर एक जनमत संग्रह के रूप में देखा गया।'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स की वापसी के साथ, यह लगभग तय है कि ट्रंप प्रशासन के विधायी एजेंडे, बजट प्रस्तावों और प्रशासनिक नीतियों की कांग्रेस द्वारा कड़ी जांच-परख की जाएगी।