केमिकल हमले के बाद सीरिया के खिलाफ जंग छेड़ चुका अमरीका इस लड़ाई में भारी नुकसान उठा रहा है।
नई दिल्ली। केमिकल हमले के बाद सीरिया के खिलाफ जंग छेड़ चुका अमरीका इस लड़ाई में भारी नुकसान उठा रहा है। इस लड़ाई में अमरीका को बड़ी मात्रा में अपना कोष खाली करना पड़ रहा है। इस बात की पुष्टि खुद अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने की है। उनके मुताबिक शनिवार को अमरीका ने सीरिया पर 120 मिसाइलें दागी, जिनकी अनुमानित कीमत 1,100 करोड़ रुपये के आसपास थी। जानकारी के अनुसार इन मिसाइलों में टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों को शामिल किया गया था। बता दें कि सीरिया में केमिकल अटैक के बाद अमरीका ने फ्रांस और ब्रिटेन के साथ वहां की सरकार के खिलाफ जंग छेड़ दी है।
एक दिन में दागी 11 अरब की मिसाइल
एक वेबसाइट इकोनॉमिस्ट डॉट कॉम के अनुसार यह काफी महंगा सौदा है। यदि अमरीकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों क कीमत आंके तो एक मिसाइल पर ही तकरीबन 9 से 10 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। अमरीकी रक्षा मंत्रालय की ओर से आए बयान में बताया गया कि शुक्रवार को एक बार में ही सीरिया पर 120 मिसाइलें दागी गई हैं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा काफी कम था। बता दें कि 2017 में अमरीका ने सीरिया में ऐसी ही 59 मिसाइलों से हमला किया था। वहीं, अमरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता हीथर नॉअर्ट का कहना है कि अमरीका को पूरा विश्वास है कि सीरिया के डौमा में हुए रासायनिक हमले के लिए असद सरकार जिम्मेदार हैं।
हमले के पीछे सीरिया सरकार का हाथ
नॉअर्ट ने कहा कि अमरीका के पास साक्ष्य हैं कि इस हमले के पीछे सीरिया सरकार का हाथ है और हम इस बारे में लगातार सूचना इकट्ठा कर रहे हैं और फिर इसका आकलन करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं आपको बता सकती हूं कि इसके लिए सीरिया जिम्मेदार है। हम कह सकते हैं कि इस हमले के पीछे सीरियाई सरकार का हाथ था। हालांकि, उन्होंने साक्ष्य दिखाने से इनकार करते हुए कहा कि ये चीजें बहुत संवेदनशील है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में इस हमले में ब्रिटेन का हाथ होने के रूस के आरोपों का भी खंडन करते हुए कहा कि रूस कहानी को पूरी तरह से बदलना चाहता है। हीथर ने कहा कि मैं दावे से कह सकती हूं कि ब्रिटेन का इससे कुछ लेना-देना नहीं है।