
Gauriganj Assembly Election 2027: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 भले ही अभी दूर हों, लेकिन गौरीगंज में सियासी तैयारियां अभी से तेज होती दिख रही हैं। समाजवादी पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने उस गढ़ को दोबारा मजबूत करने की है, जहां से राकेश प्रताप सिंह लगातार तीन बार सपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। अब उनके पार्टी से अलग राह पकड़ने के बाद सपा नए चेहरे और नए समीकरण की तलाश में जुटी नजर आ रही है।
इसी बीच पूर्व विधायक संतोष पांडेय की सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात ने गौरीगंज की राजनीति को अचानक चर्चा में ला दिया है। बुधवार को लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई। मुलाकात के बाद संतोष पांडेय ने अखिलेश यादव के साथ तस्वीर भी साझा की, जिसके बाद 2027 में उनकी भूमिका को लेकर कयास तेज हो गए।
संतोष पांडेय की गौरीगंज में सक्रियता को लेकर चर्चा सिर्फ लखनऊ की इस मुलाकात तक सीमित नहीं है। 24 अगस्त को सावन के अंतिम सोमवार पर वह गौरीगंज के बाबूगंज स्थित सगरा आश्रम में आयोजित भंडारे में भी पहुंचे थे। हालांकि, संतोष पांडेय ने इसे अपनी निजी धार्मिक यात्रा बताया है। लेकिन जब उनसे 2027 में गौरीगंज से चुनाव लड़ने की संभावना पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अगर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का आदेश होगा तो वह चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यही बयान अब इस पूरी कवायद को और दिलचस्प बना रहा है।
संतोष पांडेय सपा के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने 2012 में सुल्तानपुर की लंभुआ विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में कदम रखा था। उस चुनाव में उन्हें 74,352 वोट मिले थे और उन्होंने बसपा प्रत्याशी विनोद सिंह को 17,372 वोटों से हराया था। इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी सपा ने लंभुआ से उन पर भरोसा जताया था। सुल्तानपुर और आसपास के इलाकों में उनकी संगठनात्मक पकड़ और ब्राह्मण समाज के बीच प्रभाव को पार्टी की रणनीति में अहम माना जाता है।
गौरीगंज में सपा के सामने चुनौती केवल उम्मीदवार चुनने की नहीं है। तीन बार विधायक रहे राकेश प्रताप सिंह की स्थानीय पकड़ को देखते हुए पार्टी को ऐसा चेहरा चाहिए जो संगठन के साथ-साथ जमीन पर भी मुकाबला कर सके। ऐसे में संतोष पांडेय का नाम सामने आना सपा की संभावित रणनीति की ओर इशारा जरूर करता है, लेकिन अभी इसे टिकट का फैसला मानना जल्दबाजी होगी। अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व को ही लेना है। फिलहाल अखिलेश यादव और संतोष पांडेय की मुलाकात ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि गौरीगंज में 2027 की लड़ाई के लिए सपा ने अभी से अपनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं। और अगर संतोष पांडेय को मैदान में उतारा जाता है, तो मुकाबला राकेश प्रताप सिंह बनाम सपा के नए चेहरे के बीच एक नए सियासी समीकरण का रूप ले सकता है।