
अमेठी के पूर्व महाराज राजर्षि रणंजय सिंह
Rajrishi Ranjay Singh Death Anniversary: इतिहास में कई राजा अपने महलों, युद्धों और साम्राज्य विस्तार के लिए याद किए जाते हैं, लेकिन अमेठी रियासत के राजर्षि रणंजय सिंह ऐसे शासक थे, जिन्होंने अपनी पहचान शिक्षा और समाज सुधार के जरिए बनाई। उन्होंने सिर्फ शासन नहीं किया, बल्कि अमेठी को शिक्षा का केंद्र बनाने का सपना देखा और उसे जमीन पर उतारने का प्रयास किया। यही वजह है कि आज अमेठी को 'लहुरी काशी' (छोटी काशी) कहे जाने के पीछे उनका सबसे बड़ा योगदान माना जाता है। उनकी पुण्यतिथि 5 अगस्त को क्षेत्र में श्रद्धापूर्वक याद की जाती है।
29 अप्रैल 1901 को अमेठी रियासत के राजा भगवान बख्श सिंह के घर जन्मे रणंजय सिंह का मानना था कि किसी भी क्षेत्र का वास्तविक विकास शिक्षा से ही संभव है। उनका प्रसिद्ध विचार था कि यदि अमेठी को आगे बढ़ाना है तो सबसे पहले शिक्षा का प्रसार करना होगा। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने जीवन को तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिए समर्पित किया-
रणंजय सिंह केवल एक शासक ही नहीं, बल्कि संस्कृत, हिंदी और अन्य विषयों के अच्छे जानकार भी थे। उनकी विद्वता, सादगी और समाज के प्रति समर्पण को देखते हुए काशी की विद्वत परिषद ने उन्हें 'राजर्षि' की उपाधि से सम्मानित किया। इसके बाद वे पूरे क्षेत्र में इसी नाम से पहचाने जाने लगे।
राजर्षि रणंजय सिंह ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई शिक्षण संस्थानों की स्थापना कराई। आज भी इनमें से कई संस्थान हजारों छात्रों को शिक्षा दे रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं-
इन संस्थानों ने अमेठी और आसपास के जिलों के हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा का अवसर दिया और क्षेत्र की पहचान शिक्षा के केंद्र के रूप में मजबूत की।
स्थानीय लोगों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि अमेठी में शिक्षा का जो मजबूत आधार आज दिखाई देता है, उसकी नींव राजर्षि रणंजय सिंह ने रखी थी। बड़ी संख्या में स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना के कारण ही अमेठी को समय के साथ 'लहुरी काशी' यानी 'छोटी काशी' कहा जाने लगा।
अमेठी रियासत के वर्तमान मुखिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह का कहना है कि राजर्षि रणंजय सिंह का सपना शिक्षा के माध्यम से समाज को आगे बढ़ाना था और उसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास आज भी किया जा रहा है। वहीं, पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ. अमिता सिंह के अनुसार, बदलते समय की जरूरतों को देखते हुए तकनीकी और प्रोफेशनल शिक्षा संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है, ताकि अमेठी के युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकें।
राजर्षि रणंजय सिंह की पहचान सिर्फ अमेठी के शासक के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे दूरदर्शी शिक्षाविद के रूप में भी है जिन्होंने यह साबित किया कि किसी क्षेत्र की असली ताकत उसके महलों या संपत्ति में नहीं, बल्कि उसके शिक्षित युवाओं में होती है। यही सोच आज भी अमेठी की पहचान और उनकी सबसे बड़ी विरासत मानी जाती है।
Updated on:
5 Aug 2026, 6:29 PM IST
Published on:
5 Aug 2026, 6:29 PM IST
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