
Elephants return Anuppur- मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में लगभग 37 दिन बाद चार हाथियों का दल एक बार फिर छत्तीसगढ़ की वन सीमा पार कर अनूपपुर जिले के जैतहरी वन क्षेत्र में पहुंच गया है। बुधवार रात हाथियों का समूह छत्तीसगढ़ के मरवाही वन मंडल की सिवनी बीट से होकर जैतहरी वन परिक्षेत्र के चोलना गांव के रास्ते मध्यप्रदेश की सीमा में दाखिल हुआ। रातभर सीमावर्ती गांवों में विचरण करने के बाद गुरुवार सुबह हाथी धनगवां के जंगल में विश्राम करते पाए गए।
हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही वन विभाग सतर्क हो गया है। विभाग द्वारा प्रभावित गांवों में वाहन के माध्यम से मुनादी कर ग्रामीणों को जंगल नहीं जाने, रात के समय विशेष सावधानी बरतने तथा जंगल से लगे कच्चे मकानों में नहीं सोने की सलाह दी जा रही है।वन परिक्षेत्राधिकारी विवेक मिश्रा ने बताया कि हाथियों का यह वही दल है, जिसने कुछ माह पूर्व जैतहरी के धनगवां जंगल में चार माह से अधिक समय तक डेरा जमाए रखा था। उस दौरान एक पांचवां आक्रामक हाथी भी समूह में शामिल हुआ था, जिसके कारण जन-धन की काफी हानि हुई थी।
वन विभाग के अनुसार, बुधवार रात जैसे ही हाथियों का दल अनूपपुर वन सीमा में प्रवेश किया, उन्हें पुनः छत्तीसगढ़ की ओर मोड़ने का प्रयास किया गया। हाथियों को चोलना से कुकुरगोरा की दिशा में मोड़ा गया और वे हाईवे मार्ग से गुजरनाला तक करीब दो किलोमीटर आगे भी बढ़े, लेकिन कुछ समय बाद वापस लौटकर धनगवां के जंगल की ओर चले गए।
उल्लेखनीय है कि यह हाथी दल पिछले तीन वर्षों से लगातार जैतहरी वन क्षेत्र में प्रवेश कर लंबे समय तक निवास करता रहा है। इस वर्ष भी समूह ने धनगवां, अनूपपुर, राजेंद्रग्राम, अहिरगवां, शहडोल जिले के बुढार तथा डिंडोरी जिले के वन क्षेत्रों में चार माह से अधिक समय तक विचरण किया था।
बीते पांच माह के दौरान हाथियों के समूह, विशेषकर एक आक्रामक हाथी की गतिविधियों के कारण (Elephant Attack) छह लोगों की मौत हुई थी। बाद में उस आक्रामक हाथी का बांधवगढ़ से बुलाए गए प्रशिक्षित हाथी दल की मदद से रेस्क्यू किया गया था, जबकि शेष चार हाथी मरवाही के जंगलों के रास्ते छत्तीसगढ़ लौट गए थे। अब एक बार फिर उनके अनूपपुर लौटने से वन विभाग और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि हाथियों के करीब जाने, उन्हें देखने के लिए भीड़ लगाने तथा जंगल क्षेत्रों में अकेले जाने से बचें तथा किसी भी गतिविधि की तत्काल सूचना वन अमले को दें।