अनूपपुर

डॉक्टरों की अनदेखी माताओं की जान से खिलवाड़, रेफरल में कैसे सुरक्षित जन्म लेगा नवजात

डॉक्टरों की अनदेखी माताओं की जान से खिलवाड़, रेफरल में कैसे सुरक्षित जन्म लेगा नवजात
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How to safeguard the lives of mothers unaware of the doctors, the refe

संस्थागत प्रसव में जिले के ३६ प्रसव प्वाईंट हो रहे फेल, प्रसव पीडि़ताएं जिला अस्पताल हो रही रेफर
अनूपपुर। जिलेभर के ग्रामीण क्षेत्रों मेें जरूरत के अनुसार पास के ही स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रसव पीडि़त महिलाओं को भर्ती द्वारा सुरक्षित प्रसव कराने की कवायद में अब जिले में बनाए गए ३६ प्रसव प्वाईंट बेकार साबित हो रहे हैं। इनमें दो मात्र प्रसव प्वाईंटों पर प्रसव पीडि़त माताओं की भीड़ जुट रही है, शेष अन्य केन्द्रों पर डॉक्टरों द्वारा सामान्य केस को भी जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। इससे जहां प्रसव पीडि़त माताओं के साथ परिजनों को परेशानियों को सामना करना पड़ता है वहीं जिला अस्पताल पर मरीजों का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। प्रसव के लिए माताओं को सीधे जिला अस्पताल न आना हो, विभाग द्वारा जिलेभर में तीन स्तरीय ३६ प्वाईंट स्थापित किए है। इनमें तीन स्तरीय में जिला अस्पताल व पुष्पराजगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सहित११ अन्य को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों सहित बड़ी केन्द्रों को स्तर दो में शामिल कर सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। वहीं २३ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को स्तर एक में प्रसव प्वाईंटों में निर्धारित कर प्रसव को सुरक्षित कराने की व्यवस्था अपनाई गई। लेकिन आलम यह है कि अब सिर्फ स्तर तीन श्रेणी के अस्पतालों में प्रसव की जिम्मेदारी निभाई जा रही है। शेष प्रसव प्वाईंटों पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर बनाए गए कुछ प्रसव प्वाईंटों पर अब लगभग प्रसव नहीं कराया जाता। यहंा आने वाले अधिकांश प्रसव पीडि़त माताओं को प्रसव प्वाईंट के नाम पर भर्ती कर तत्काल क्रिटिकल बताकर जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिसके कारण आनन फानन में परिजन भी रेफर को मजबूर हो जाते हैं। इनमें सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर प्रतिमाह ७-८ प्रतिशत प्रसव ही हो पाते है, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थिति और भी दयनीय है यहंा मात्र २-३ प्रतिशत प्रसव हो पाए हैं। वहंी जिला अस्पताल में यह आंकड़ा ४०-४५ प्रतिशत प्रतिमाह तक पहुंच जाता है। जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों कोलमी, सकरा, कोठी, बिजुरी, बेनीबारी, करपा, राजनगर, अमगवां, पोंडकी, सकोला से आने वाली प्रसव पीडि़त माता संग परिजनों को जिला अस्पताल में भी जांच, व प्रसव के तीन दिनों उपरांत वापसी सम्भव हो पाती है। वहीं शिशु कुपोषित होने पर एसएनसीयू में भर्ती के बाद माता व परिजनों को १४ दिनों तक जिला अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं।
बॉक्स: किस काम के प्रसव प्वाईंट
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिलेभर में प्राथमिक व उपस्वास्थ्य केन्द्रों सहित बनाए गए २३ प्रसव प्वाईंट पर प्रसव नहंी कराए जाने की स्थिति में यह बात स्पष्ट हो गई है कि यह विभाग के लिए किसी कार्य की नहीं रही। फिर भी विभाग द्वारा संसाधन मुहैया कर उसे संचालित किया जा रहा है। इसमें विभागीय अनदेखी सहित जांच पड़ताल की कमी नजर आ रही है।
वर्सन:
कुछ केन्द्रों पर लोग भी प्रसव के लिए नहंी जाना चाहते हैं। हालांकि जिला अस्पताल में सुविधाओं की कमी नहीं है, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी इन मामले में जिला अस्पताल को ही सुरक्षित मानकर भर्ती हो जाते हैं। फिर भी प्रसव प्वाईंटोंं की मॉनीटरिंग कराई जाएगी।
डॉ. आरपी श्रीवास्तव सीएमएचओ अनूपपुर।
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Published on:
23 Apr 2018 08:03 pm