
पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटलबिहारी वाजपेयी के निधन में मौन धारण कर दी श्रद्धांजलि
अनूपपुर। भारत रत्न देश के पूर्व प्रधानमंत्री, प्रख्यात कवि व भारतीय राजनीति के आधार स्तभं कहे जाने वाले जन-जन के नेता ९३ वर्षीय अटल बिहारी बाजपेेयी के निधन से अनूपपुर जिले का पूरा कोना-कोना गम में गमगीन है। हर वर्ग के लोगो ने अपना दुख प्रकट किया। सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगो ने संवाद कर उनके निधन को अपूरणीय क्षति मानते हुए राजनीति युग का अवसान की बात कही। शुक्रवार की शाम से लेकर शनिवार दिनभर जिले में जगह-जगह शोक सभा एंव श्रंद्धांजलि अर्पित की गई। कोयलांंचल क्षेत्र के मीडियाकर्मियों ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटलबिहारी वाजपेयी के निधन पर कोतमा वाचनालय भवन में शोक सभा कर छाया चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर 2 मिनट को मौन रखा। जबकि नगर के गांधी चौक पर शुक्रवार की शाम को सर्वदलीय एंव नागरिकों, व्यापारियों द्वारा भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धा-सुमन अर्पित कर शोकसभा आयोजित की। नगर के रामरुद्र सराफ एंव अवधेश ताम्रकार द्वारा अटल जी के साथ बिताए पलों को याद कर बताया कि अटल जी राजनीति से उपर थे, विपक्ष भी उनका लोहा मानता था। वहीं भालूमाड़ा पसान नगरपालिका कार्यालय में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के दुखद निधन पर शोकसभा का आयोजन किया गया। जिसमें नपा के मुख्य प्रशासकीय अधिकारी सहित नगर पालिका के कर्मचारी स्टाफ व पार्षद सहित अन्य लोग शामिल हुए। सभी लोगों ने पूर्व प्रधानमंत्री के चित्र पर पुष्प अर्पण कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और 2 मिनट का मौन रख दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना किए। इसी प्रकार राजनगर में भी पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न पं. अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर भाजपा मंडल राजनगर द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर दो मिनट का मौन धारण किया गया। कार्यक्रम में सभी धर्मो के लोगों के साथ साथ राजनीति से जुड़े सभी सर्वदलीय सदस्य, श्रम संघो के सदस्य, व्यापारी वर्ग, महिलाएं, मीडियाकर्मियों ने भी भगत सिंह चौक पर उपस्थित होकर स्व. वाजपेयी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम से पूर्व राम नाम संर्कीतन का आयोजन किया गया। वहीं बदरा में आयोजित शोकसभा में स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन हर भारतीय को हमेशा मिलता रहेगा। वक्ताओं ने कहा हम नि:शब्द हैं। शून्य में हैं। लेकिन भावनाओं का ज्वार उभर रहा है। हम सभी के श्रद्धेय अटल हमारे बीच नहीं रहे। अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। उनका जाना एक युग का अंत है। उन्होंने लिखा मौत की उमर क्या है, दो पल भी नहीं। जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया मैं मन से मरूं, लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूं?