अनूपपुर

वनराज ने लांघी पुष्पराजगढ़ की सीमा

अकुआ सहित आसपास के गांवों में दिखे बाघ के पदचिन्ह
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Updated: 20 Nov 2017, 4:44 PM IST
Vanraj crossed the length of Pushparajgarh
Vanraj crossed the length of Pushparajgarh

अनूपपुर. उमरिया जिले की घनघुटी वनपरिक्षेत्र की सीमाओं से बाघों का कुनवा अब अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ विकासखंड के अहिरगंवा गांव की सीमा लांघ अनूपपुर वनपरिक्षेत्रों में भी अपनी चहल कदमी देने लगा है। अहिरगंवा वनीय क्षेत्र के कैमरे मेें कैद हुई बाघ के उपस्थिति उपरांत अब कुछ दिनों से अनूपपुर वनपरिक्षेत्र के अकुआ, अवढैरा, डिंडवापानी गांव में दो गायों के शिकार और आसपास के गांवों में लगातार भ्रमण कर शिकार की खोज कर रहा है।
जिसमें सम्भावना जताई जा रही है कि बाघ अवढैरा, किरर, जमुड़ी, अकुआ, सजहा, खुलैया, डालाडीह सहित पचड़ीपानी, पटपड़हा, के जंगल में अपना भ्रमण क्षेत्र बनाए हुए हैं। इसमें अकुआ गांव में किसानों ने बाघ द्वारा शिकार किए गए गाय के मांस खाता देखकर इसकी जानकारी वनविभाग को दी। वहीं किसानो ने गांव के धान की गीली खेत में बाघ के पंचे के निशान भी पाएं हैं। जिसकी सूचना पर वनविभाग ने गश्त आरम्भ कर ग्रामीणों को वनीय क्षेत्रों में जाने के दौरान सतर्कता बतरने की सलाह दी।
साथ ही गश्त के माध्यम से बाघों पर भी निगरानी बनाने के प्रयास किए। हालांकि बाघों के अनूपपुर वनपरिक्षेत्र में भ्रमण को लेकर वनविभाग उफापोह की स्थिति में बनी है। इसमें वनविभाग ने दो तेंदुआ के वनपरिक्षेत्र में उपस्थिति जताते हुए बाघों पर सम्भावना जताई है।
उनके अनुसार पूर्व में एकाध बार बाघ को विचरण करते देखा गया है। लेकिन वर्तमान में जंगल के कुछ सम्भावित हिस्से जहां बाघों का आगमन सम्भव हो सकता है में लगे ट्रेप कैमरे में उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हुई है। जबकि विभागीय सूत्रों के अनुसार अनूपपुर में दो बाघ सहित आधा दर्जन तेंदुएं की उपस्थिति फिलहाल बनी हुई है। लेकिन वन अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों से सम्पर्क नहीं कर सम्भावनाओं के आधार पर उनकी उपस्थिति गौण बता रहे हैं।
जिसके कारण ग्रामीण अंचलों में बाघ के मूवमेंट तथा उनसे होने वाली आकस्मित हादसों को लेकर विभाग सुस्त नजर आने लगा है। वनपरिक्षेत्र अधिकारी एके निगम के अनुसार वनीय क्षेत्र में तीन कैमरे लगाएं गए हैं, लेकिन इनमें किसी बात के मूवमेंट की पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने बाघ होने की जानकारी दी है। इसके लिए मौके पर जाकर निरीक्षण भी किया गया है। पाए गए पदचिह्न बाघ के हैं, लेकिन तेंदुआ और बाघ के पंचे भी समान चौड़ाई में होते हैं फर्क १९-२० को होता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बाघ की उपस्थिति दरकिनार कर दी जाए।
विभागीय जानकारी के अनुसार १५ नवम्बर की शाम को अवढैरा निवासी गोपाल सिंह तथा रामसिंह की दो नग गाय का जंगल में बाघों ने शिकार कर लिया था। जिसमें १६ नवम्बर को पशु पालकों ने खोजबीन के दौरान जंगल में ही बाघ को मांस खाते पाया गया है। वहीं १८ नवम्बर की दोपहर अकुआ गांव निवासी अर्जुन सिंह गोंड तथा पिट्टू सिंह के धान की खेत में बाघ के पंजे के निशान पाए गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार अनूपपुर वनीय क्षेत्र में चीतल के शिकार के दौरान उभडऩे वाली आवाज, भागदौड़ तथा गायों के शिकार पिछले १०-१२ दिनों से बने हुई हैं। इसमें चीतल के खदेडऩे के साथ उसकी दहाड़ भी सुनी गई है। इसकी सूचना वनरक्षक हरिशंकर महरा, परिक्षेत्र सहायक रिचर्ड रेगी राव, वनचौकी के संतोष श्रीवास्तव को जानकारी दी गई। लेकिन अधिकारियों ने इसपर ग्रामीणों को भी भ्रामक जानकारी देना बताया। वहीं अधिकारियों द्वारा बाघ सूचना के बाद भी मुख्य मार्ग पर ही गश्त की कार्रवाई की जा रही है, जबकि ग्रामीण अचंलों में अब भी ग्रामीण असुरक्षित और अंजान बने हुए हैं।
सीसीएफ ने किया वैंकटनगर क्षेत्र का दौरा
वैंकटनगर क्षेत्र में भालूओं की अधिक तदाद में पाए जाने तथा ग्रामीण अचंलों में प्रवेश की सूचनाओं पर रविवार १९ नवम्बर को सीसीएफ प्रशांत जाधव ने वैंकटनगर क्षेत्र का भ्रमण किया। जहां तीन-चार गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों से चर्चा की। इस दौरान बांधवगढ़ से आई रेस्क्यू टीम को भी प्रशिक्षण दिलाया गया। जिसमें भालू के हमले तथा उनसे बचाव साथ ही भालूओं को सुरक्षित जंगल में वापसी कराना शामिल रहा।

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