MP News : रहस्यों का तुम्बवन! जहां सदियों पहले पलट गई थी सभ्यता, आज भी हैं अनसुलझे शिलालेख। एक खुला म्यूजियम जो समेटे है द्वापर के रहस्य, हजारों साल पुरानी यहां धरोहरें गलियों में लावारिस पड़ी हैं। खुदाई में निकलते हैं, मकानों व सामान के उलटे ढांचे।
MP News : अगर आप इस रविवार किसी ऐसी जगह जाने की योजना बना रहे हैं, जहां कदम रखते ही आप सदियों पुराने इतिहास, रहस्य व आध्यात्म के रोमांच में डूब जाएं तो मध्य प्रदेश के अशोकनगर शहर की भीड़भाड़ से महज 10 कि.मी दूर स्थित तूमेन गांव आपका इंतजार कर रहा है। ये सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि एक ऐसा खुला संग्रहालय है जो अपने सीने में द्वापर युग से लेकर 12वीं शताब्दी तक के रहस्य समेटे हुए है। हालांकि, ये दुर्भाग्य ही है कि, जिस पुरातात्विक संपदा को विश्व धरोहर का हिस्सा होना चाहिए, वो इस गांव की गलियों और खुले मैदानों में उपेक्षा की धूल फांक रही हैं।
इतिहास के पन्नों को पलटें तो तूमेन का प्राचीन नाम तुम्बवन मिलता है। इसे राजा मोरध्वज की नगरी कहा जाता था। कहा जाता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण अपने सखा अर्जुन के साथ इस नगरी में पधारे थे। यह गांव उसी गौरवशाली कालखंड का मूक गवाह है।
तूमेन गांव भूगर्भ वैज्ञानिकों और पुरातत्वविदों के लिए किसी पहेली से कम नहीं है। यहां 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 12वीं शताब्दी तक की पुरासंपदा जगह-जगह बिखरी पड़ी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां जब भी खुदाई होती है, तो कई बार मकानों के ढांचे व सामान उलटे निकलते हैं। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्राचीन काल में यहां कोई भीषण भौगोलिक उथल-पुथल या विनाशकारी भूकंप आया होगा, जिसने पूरी की पूरी सभ्यता को पलट कर रख दिया।
स्थानीय निवासी रासबिहारी तिवारी बताते हैं कि तूमेन प्राकृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी बेहद समृद्ध है। यह गांव तीन नदियों के त्रिवेणी संगम पर बसा है। गांव में अति प्राचीन मां विंध्यवासिनी मंदिर, बलदाऊ मंदिर और पहाड़ी पर मां महिषासुरमर्दिनी का भव्य मंदिर स्थित है। हजारमुखी शिवलिंग अपने आप में दुर्लभ और अद्भुत है। यहां लाखा बंजारा की प्राचीन बाखर मौजूद है। इस पर एक बेहद रहस्यमयी शिलालेख लगा हुआ है। इस शिलालेख की लिपि न तो ब्राह्मी है, न प्राकृत और न ही संस्कृत। यह किसी अज्ञात प्राचीन लिपि में है, जिसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका है।
जब आप तूमेन की गलियों से गुजरते हैं, तो इतिहास का यह बिखराव आपको भीतर तक झकझोर देता है। जो मूर्तियां और नक्काशीदार पत्थर किसी अंतरराष्ट्रीय म्यूजियम की शान बढ़ाने चाहिए थे, वे यहां खुले मैदानों, रास्तों और बाड़ों में लावारिस पड़े हैं। विडंबना देखिए कि इस अमूल्य धरोहर को सहेजने गांव में एक म्यूजियम का निर्माण तो करवा दिया गया, लेकिन वह आज भी खाली पड़ा है। मूर्तियां बाहर धूप और बारिश में नष्ट हो रही हैं और म्यूजियम के अंदर सन्नाटा पसरा है।