दुनिया के प्रयर्टन प्रेमियों की पसंदीदा जगह है चंदेरी, प्रकृति के साथ ऐतिहासिक धरोहर है खास
अशोक नगर. जब भी मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों की बात आती हैं तो उसमे चंदेरी का नाम जरूर लिया जाता हैं. चंदेरी का शानदार इतिहास रहा हैं जो मालवा सुल्तानों और बुंदेला राजपूतों से जुड़ा हुआ हैं, जिन्होंने 15 वीं और 16 वीं शताब्दी में इस क्षेत्र पर शासन किया था। चंदेरी का प्राचीन नाम चंद्रानगर था. गुप्त वंश के राजा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने यहां पर किले का निर्माण करवाया था।
अनोखी पहाड़ियों, झीलों और जंगल से घिरा यह खूबसूरत शहर चंदेरी साड़ियों और ऐतिहासिक स्थलों के लिए जाना जाता हैं। यह साड़ियां कई देशों में भी निर्यात की जाती हैं। चंदेरी के हर कोने में कई किस्से कहानियां सुनने को मिलते हैं। चंदेरी के कई आकर्षक स्थानों को बॉलीवुड की कई फिल्मों में भी दिखाया गया हैं. वरुण धवन और अनुष्का शर्मा की फिल्म सुई धागा की शूटिंग चंदेरी में की गई हैं।
चंदेरी का किला
चंदेरी का किला यहां के सबसे प्रमुख पर्यटक स्थलों में गिना जाता हैं जिसका निर्माण मुगलकाल के दौरान किया गया था. इस किले की मूल संरचना को राजा कीर्तिपाल द्वारा 11वी शताब्दी के आसपास बनवाया गया था। अतीत से जुड़े पन्ने बताते हैं यह किला कई आक्रमण झेल चुका हैं, इसीलिए इसका कई बार पुनर्निर्माण करवाया जा चुका हैं। शहर से 71 मीटर ऊंचाई की एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस किले से आपको शहर के नीचे का मनोरम दृश्य दिखाई देता हैं।
बादल महल गेट
बादल महल दरवाजा अपनी तरह का अनूठा द्वार हैं जो किसी महल की तरफ नहीं जाता हैं। इस द्वार का उद्देश्य राजकीय अतिथियों और आने वाले राजाओं का भव्य तरीके से सम्मान और अभिनंदन करना था। इस महल का निर्माण 15वी शताब्दी में किया गया था। यह विशाल प्रवेश द्वार चंदेरी की बड़ी जीत की ख़ुशी में बनवाया गया था। यह गेट अपनी दो मीनारों के साथ खड़ा हैं जो देखने में बहुत ही आकर्षक नजर आता हैं। प्रवेश द्वार पर की गई शानदार नक्काशी पर्यटकों का ध्यान खींचती हैं।
बत्तीसी बावड़ी
यह चंदेरी की सबसे बड़ी बावली हैं. साल के सबसे गर्म महीनों में भी यह हमेशा पानी से भरी रहती हैं। बावड़ी में वर्गाकार रूप में 32 घाट हैं। इस कारण इसका नाम बत्तीसी बावड़ी हैं। इस बावड़ी का आकर्षण इसकी बनावट और जल सतह की समानता हैं। बावड़ी के निर्माण में खूबसूरत पत्थरों का उपयोग किया गया है जो इसकी शोभा को और बढ़ा देते हैं। बजरी वाली सड़क पर झाड़ियों से होते हुए यहां तक पहुंचने में लंबा सफर तय करना पड़ता है। बावड़ी में जाने के लिये दो दरवाजे व सीढ़ियां बनीं हुईं है।
राजघाट बांध
राजघाट बांध वीकेंड पर घूमने के लिए एकदम बेस्ट जगह हैं। शांतिपूर्ण वातावरण में स्थित इस जगह पर आप अपने परिवार के साथ आ सकते हैं। यह बांध उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों की संयुक्त परियोजना है। यहां पर आकर आप सूर्यास्त की ख़ूबसूरती को देखना न भूलें।