
अशोकनगर। कचनार थानांतर्गत महुआखेड़ा के पास ९ दिसंबर की रात हुए हादसे में घायल युवक ने भोपाल के एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। शनिवार को जब उसका शव गांव पहुंचा तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार ने लाखों रुपए खर्च कर दिए, लेकिन युवक की जान नहीं बची। दुर्घटना 9 दिसंबर को रात में करीब आठ बजे हुई थी। इसमें बाइक सवार दो युवको को ट्रैक्टर ने टक्कर मार दी थी। इस हादसे में कचनार निवासी दीपक पुत्र ऋषभकुमार जैन और मुकेश पुत्र करणसिंह कुशवाह घायल हो गए थे, जो शादी समारोह में शामिल होने के लिए बाइक से अशोकनगर आ रहे थे। एक्सीडेंट में दीपक का पैर घुटने से टूट गया, वहीं मुकेश को सिर व हाथ में गंभीर चोट आई। दीपक को परिजनों ने उपचार के नागपुर हास्पिटल में भर्ती करवाया गया था। जहां शुक्रवार को अस्पताल में डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
नहीं मिल सकी सरकारी मदद
युवक के परिजनों ने बताया कि उन्होंने सरकार से मदद के लिए भी आवेदन कर रखा था। लेकिन आचार संहिता लागू होने के कारण उन्हें मदद नहीं मिल सकी। वे भोपाल सीएम हाउस भी गए थे, लेकिन वहां से भी कुछ नहीं हो सका।
दो दिन रखे रहे, पैसा लेकर ही छोड़ा
परिजनों का आरोप है कि बंसल अस्पताल में मृतक को दो दिन वेंटीलेटर पर रखे रहे। उसकी मौत कल हो गई थी, इसके बाद भी एक दिन और रखकर 70 हजार रुपए का बिल बढ़ा दिया। नागपुर अस्पताल से उसे बंसल अस्पताल भेजा गया था। अस्पताल ने 1.30 हजार रुपए लेकर ही उसे आने दिया। वहीं चार लाख रुपए का बिल नागपुर अस्पताल में बन गया था। रिश्तेदारों व समाजजनों ने पैसा एकत्रित कर भेजा, तब जाकर अस्पताल का बिल भरा और शव को लेकर आए।
हादसे से नहीं ले रहे सबक, स्टेशन रोड पर अतिक्रमण बना समस्या
इधर, रेलवे स्टेशन रोड पर एक दिन पहले हुए हादसे के बाद भी न तो लोग सुधरे और न ही जिम्मेदारों ने कोई ध्यान दिया। यहां वाहन पार्किंग व अतिक्रमण समस्या बन गया है और शुक्रवार जैसा हादसा कभी भी हो सकता है। शनिवार को कई वाहन डिवाइडर पर चढ़ते-चढ़ते बचे। उल्लेखनीय है कि स्टेशन रोड पर शुक्रवार दोपहर में एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर की ट्राली का पहिया डिवाइडर पर चढ़ गया था और ट्राली पलट गई थी। हादसे में दो युवतियां ट्राली की चपेट में आने से बाल-बाल बची थीं। इस हादसे के बाद पत्रिका टीम ने रोड पर जायजा लिया तो कई बार ऐसी स्थिति बनती दिखी। रोड पर वाहनों की पार्किंग व अतिक्रमण के कारण सडक़ की चौड़ाई कम हो गई है और वाहनों के पहिए, बिल्कुल डिवाइडर के पास से गुजरते हैं। यहां दो व चार पहिया वाहन सडक़ पर ही पार्क किए जा रहे हैं। इसके अलावा शहर में दिन में भी भारी वाहनों व ट्रैक्टर-ट्रालियों की आवाजाही जारी है। इन्हें रोकने और यातायात को व्यवस्थित करने के लिए जिम्मेदार कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।