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Success Story: गरीबी को हराकर चंदेरी की पहचान बनीं प्रेमबाई, 40 साल की मेहनत ने बदली तकदीर, मिला पुरस्कार

Success Story: चंदेरी की प्रेमबाई कोली ने हथकरघा बुनाई से परिवार की गरीबी दूर की और पांच बच्चों को अच्छी शिक्षा दी। दो चश्मी-दाढ़ीदार साड़ियों से पहचान बनाई, राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित।
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अशोकनगर

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Astha Awasthi

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Updated: 30 Oct 2026, 1:17 PM IST

प्रेमबाई कोली (Photo Source - Patrika)

प्रेमबाई कोली (Photo Source - Patrika)

Success Story: मुफलिसी के अंधेरे को चीरकर जब कोई महिला अपने हुनर को हथियार बनाती है, तो कामयाबी की नई इबारत लिखी जाती है। चंदेरी के नयापुरा मोहल्ले की रहने वाली प्रेमबाई कोली की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। परिवार की तंगहाली को दूर करने के लिए उन्होंने हथकरघे को अपनी ताकत बनाया और दिन-रात की हाड़-तोड़ मेहनत से न सिर्फ अपना, बल्कि पूरे परिवार का भाग्य बदल दिया। हुनर से होनहार तक का उनका यह सफर आज हर महिला के लिए प्रेरणा बन चुका है।

करघे की खटपट और धागों की बुनावट के बीच प्रेमबाई के संघर्षशील जीवन के 40 साल कब गुजर गए, उन्हें पता ही नहीं चला। इन चार दशकों के कड़े संघर्ष में उन्होंने अपने पांच बच्चों का लालन-पालन किया और उन्हें अच्छी शिक्षा दी। आज वह अपने बच्चों को भी इस पुश्तैनी हस्तकला का हुनर सिखा रही हैं।

दो चश्मी और दाढ़ीदार साडिय़ों से मिली पहचान

प्रेमबाई के हाथों से बुनी गई चंदेरी साडिय़ों की बाजार में हमेशा भारी मांग रहती है। उनकी दूरदर्शी कारीगरी का ही नतीजा है कि नए-नए डिजाइनों और रंगों से सराबोर दो चश्मी और दाढ़ीदार साडिय़ां उनकी विशेष पहचान बन चुकी हैं। अपनी इस अनूठी कला से प्रेमबाई ने न केवल अपनी गरीबी को मात दी है, बल्कि चंदेरी की विश्व प्रसिद्ध बुनाई परंपरा को भी नई दिशा भी दी। प्रेमबाई की यह कहानी महज एक सफलता का बखान नहीं है, बल्कि यह उस जीवटता का प्रमाण है जिसने एक आम महिला को कोली समाज और पूरे इलाके का गौरव बना दिया है। साथ ही साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो मेहनत के धागों से तकदीर को भी अपने हिसाब से बुना जा सकता है।

राज्य स्तरीय पुरस्कार से हो चुकी हैं सम्मानित

उनके इसी बेजोड़ हुनर और अनथक संघर्ष को नमन करते हुए मध्य प्रदेश शासन ने वर्ष 2020-21 में प्रेमबाई को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। कल तक जो परिवार आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा था, आज अपनी मेहनत की बदौलत वह सभी भौतिक सुख-सुविधाओं से संपन्न है।