
बर्थ-डे केक, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
Ashoknagar news: जन्मदिन हो या सालगिरह, जश्न का कोई भी मौका अब केक काटे बिना अधूरा सा लगता है। लेकिन क्या कभी सोचा है कि जिस केक को आप अपने बच्चों और अपनों को बड़े चाव से खिला रहे हैं, वह कितना शुद्ध है ? जिले में इन दिनों धड़ल्ले से 5 से 7 दिन पुराना केक बेचा जा रहा है। जिसकी फिनिशिंग और सफेद क्रीम के पीछे सेहत से खिलवाड़ का बड़ा खेल पनप रहा है, जिससे आम उपभोक्ता पूरी तरह अनजान है। जिले में हर दिन औसतन 300 केक का कारोबार होता है, जिनमें से 100 से 150 केक तो अकेले अशोकनगर शहर में ही बिक जाते हैं। बाजार में 150 रुपए से लेकर एक हजार रुपए तक के केक उपलब्ध है। खास बात यह है कि जिले में केक का निर्माण नाममात्र का होता है। दुकानदारों के मुताबिक ज्यादातर केक बीना और भोपाल से मंगाए जाते हैं। बीना के सप्लायर भी मुख्य रूप से भोपाल से ही माल मंगाकर यहां खपा रहे है।
स्थानीय दुकानदारों की ही मानें तो जिले में बनने वाला ताजा केक बमुश्किल दो-तीन दिन ही चल पाता है। ऐसे में भोपाल और बीना से आने वाला केक 5 से 7 दिनों तक खराब क्यों नहीं होता? बाहर से आने वाले इन केकों की फिनिशिंग बहुत अच्छी होती है और क्रीम ज्यादा सफेद व आकर्षक होती है। इसी चमक के फेर में दुकानदार मुनाफा कमाने के लिए बाहरी केक मंगवाते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बाहरी केक में ऐसा क्या मिलाया जा रहा है, जिससे वह हफ्ते भर तक तरोताजा और आकर्षक दिखता है? क्या इसे लंबे समय तक टिकाए रखने के लिए किसी हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल हो रहा है? जिम्मेदार विभागों की अनदेखी के बीच, यह मीठा खतरा जिले में बेखौफ बिक रहा है, जो लोगों की सेहत पर भारी पड़ सकता है।
Updated on:
22 Oct 2026 10:15 am
Published on:
22 Oct 2026 10:15 am
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