बांग्लादेश सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक अब तक 18,300 गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई, जो शरणार्थी कैंपों में रह रही हैं।
नई दिल्ली। रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ (यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रन्स इमरजेंसी फंड) ने एक चिंतित करने वाली रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक रोहिंग्या शरणार्थी कैंप में हर दिन करीब 60 बच्चे पैदा हो रहे हैं। हालांकि इनमें उन महिलाओं की संख्या ज्यादा है जिनके साथ म्यांमार की सेना और विद्रोहियों ने दुष्कर्म किया था।
हिंसा और दुष्कर्म की शिकार महिलाएं बन रहीं मां
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक बांग्लादेश में करीब नौ लाख रोहिंग्या शरणार्थी कैंपों में रह रहे हैं। यूनिसेफ के बांग्लादेश प्रतिनिधि एडौर्ड बेगबेडर के मुताबिक हर दिन इन कैंपों में करीब 60 बच्चे जन्म ले रहे हैं। इनकी मांएं विस्थापन के दौरान हिंसा और दुष्कर्म की घटनाओं का शिकार हो चुकी हैं। उनके मुताबिक, ‘यह बता पाना मुश्किल है कि यौन उत्पीड़न की वजह से कितने बच्चों का जन्म हुआ और कितनों का होने वाला है। इसके साथ ही हर मां और नवजात को जरूरी सहायता सुनिश्चित करना भी मुुश्किल है।’
बांग्लादेश सरकार के आंकड़े
बांग्लादेश सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक अब तक 18,300 गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई, जो शरणार्थी कैंपों में रह रही हैं। अनुमान के मुताबिक इनकी संख्या 25 हजार तक जा सकती है।
...रोहिंग्याओं को इसलिए छोड़ना पड़ा था देश
पिछले साल अगस्त में रोहिंग्याओं ने म्यांमार के राखाइन प्रांत में सैन्य शिविरों पर हमला किया था। इसके बाद म्यांमार के सुरक्षाबलों और स्थानीय संगठनों ने कथित तौर पर उन पर पलटवार किया था। इसके बाद ज्यादातर रोहिंग्याओं को देश छोड़कर भागना पड़ा था। इस दौरान जमकर हिंसा, यौन उत्पीड़न और आगजनी की घटनाएं हुईं। गौरतलब है कि भारत में भी रोहिंग्याओं को लेकर मानवीयता बनाम देश सुरक्षा का मुद्दा लंबे समय से बहस का हिस्सा है।