
नई दिल्ली। चीन ने दक्षिण चीन सागर में कब्जा किए गए द्वीपों का 2017 में विस्तार किया और वहां रडार सुविधाओं और हैंगर समेत अन्य सुविधाओं का निर्माण किया, जो 2,90,000 वर्गमीटर के क्षेत्र में फैला है। आधिकारिक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। चीन का ऊर्जा से भरपूर दक्षिण चीन सागर के 90 फीसदी क्षेत्र पर दावा है, जिसे लेकर उसका देशों के साथ विवाद है। इसे देखते हुए चीन इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है।
रिपोर्ट में खुलासा
नेशनल मरीन डेटा एंड इंफॉरमेशन सर्विस और पीपल्स डेली के ओवरसीज एडिशन द्वारा संयुक्त रूप से चलाए जा रहे वेबसाइट नानहाई डॉट हाईवाईनेट डॉट सीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में 2017 में 2,90,000 वर्गमीटर क्षेत्र में निर्माण किया, जिसमें अंडरग्राउंड स्टोरेज, एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग्स, और बड़े रडारों की स्थापना शामिल है। इस रिपोर्ट में कहा गया कि चीन ने दक्षिण चीन सागर के द्वीपसमूह के क्षेत्र में अपना व्यापक रूप से विस्तार किया है ताकि उसके प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में सैन्य रक्षा क्षमता बढ़ाई जा सके तथा उन द्वीप समूहों पर रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।
5000 करोड़ डॉलर का व्यापार
दक्षिण चीन सागर से करीब 5,000 करोड़ डॉलर का समुद्री व्यापार होता है, जिस पर चीन के अलावा मलेशिया, ब्रुनेई, वियतनाम, फिलीपींस और ताइवान का भी दावा है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया के संकट से चीन को फायदा हुआ है, क्योंकि अमरीका उसे सुलझाने में व्यस्त हैं। वहीं, चीन विवादित क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है। हिन्द महासागर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए चीन ने म्यांमार को अपना दोस्त बनाकर उससे सैन्य सबन्ध बढ़ा लिए हैं। चीन, म्यांमार को परमाणु व मिसाइल क्षेत्र में सहयोग प्रदान कर रहा है। चीन ने म्यांमार के द्वीपों पर नौ सनिक सुविधाएं बढ़ा रखीं हैं जिससे हिन्द महासागर में भारतीय नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकी। म्यांमार के हांगई द्वीप पर राडार व सोनार जैसी संचार सुविधाओं का स्थापित किया जाना चीन की ही देन है। म्यांमार के क्याकप्यू में भी चीन बन्दरगाह बना रहा है और थिलावा बन्दरगाह पर भी चीन का आवागमन है। यहां के सितवे बन्दरगाह पर चीन एक तेल व गैस पाइप बना रहा है जिससे वह इसका लाभ उठा सके।