नितिन ए गोखले की किताब में दावा किया गया है कि चीन ने एक महीने पहले ही चुम्बी घाटी में 12 हजार से ज्यादा सैनिक और 150 टैंकों को तैनात किया था
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाज को सुलझे करीब एक महीना होने जा रहा है, डोकलाम का इश्यू सुलझ जाने के बाद चीन ने भारत पर ये आरोप लगाया था कि समझौते के बावजूद भी भारत ने विवादित सीमा से अपने सैनिकों को नहीं हटाया है। डोकलाम विवाद सुलझने के बाद एक किताब के जरिए ये खुलासा हुआ है कि चीन ने करीब 1 महीने पहले से ही डोकलाम में अपने सैनिकों की तैनाती की हुई थी। जिस वक्त डोकलाम में भारत और चीन के बीच विवाद चल रहा था, उस दौरान दोनों देशों की तरफ से ये कहा गया था कि विवाद के दौरान दोनों देशों ने बहुत कम संख्या में अपने सैनिकों की तैनाती वहां की हुई थी, लेकिन एक किताब के जरिए जो खुलासा अब हुआ है उसके मुताबिक, चीन ने एक समय पर करीब 12 हजार सैनिक, 150 टैंक और आर्टिलरी बंदूकें चुम्बी घाटी में तैनात कर रखी थीं। इससे साफ है कि चीन की मंशा डोकलाम को लेकर युद्ध करने की थी।
तस्वीरों में नजर आए हजारों सैनिक और टैंक
चीन ने अपने हजारों सैनिक और आधुनिक हथियार फारी डजोंग में तैनात किए हुए थे, जो कि भारत के सिक्किम के ठीक दूसरी तरफ स्थित है। डोकलाम विवाद सुलझ जाने के बाद नितिन ए गोखले की किताब “सिक्योरिंग इंडिया द मोदी वेः पठानकोट, सर्जिकल स्ट्राइक एंड मोर” में इस बात का खुलासा किया गया है। इस किताब में डोकलाम की अनमैन्ड एरियल वेहिकल (यूएवी) से ली गयी तस्वीरें भी शामिल हैं, जिसमें देखा गया है कि चीन पहले से ही यु्द्ध के लिए तैयार था।
शुक्रवार को इस किताब का होगा लोकार्पण
किताब के अनुसार डोकलाम विवाद दरअसल मई में शुरू हो चुका था लेकिन चीनियों ने 26 जून को इसे सार्वजनिक किया। डोकलाम विवाद करीब 73 दिनों बाद ही सुलझा। किताब में डोकलाम विवाद के हर घटनाक्रम की जानकारी के साथ ही भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, सेना के वरिष्ठ अफसरों और नरेंद्र मोदी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बयान भी हैं। आपको बता दें कि उप-राष्ट्रपति शुक्रवार को नई दिल्ली में इस किताब को लोकार्पण करेंगे।
बार-बार 1962 की धमकी दे रहा था चीन
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा तो चीन ने भारत के सिक्किम के सामने स्थित अपनी चौकियों पर सैनिकों की संख्या काफी बढ़ा दी थी। भारतीय सेना ने भी सैनिकों की संख्या बढ़ा दी थी। किताब के अनुसार जहां दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने थे वहाँ चीनी लाउडस्पीकर लगाकर बार-बार 1962 के युद्ध के सबक की बात दोहरा रहे थे। चीनियों ने अपने बचाव के लिए पत्थर और मिट्टी से अस्थायी निर्माण भी करना शुरू कर दिया था।