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‘पढ़ाई छोड़ो, प्यार करो’, चीन के विश्वविद्यालयों में अब रोमांस के लिए दी जा रही के लिए छुट्टियाँ

चीन के एक विश्वविद्यालय में रोमांस के लिए छुट्टी दी जा रही है। क्या है पूरा मामला? आइए नज़र डालते हैं।

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भारत

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Tanay Mishra

Mar 19, 2026

Spring break for romance in China

Spring break for romance in China (Representational Photo)

चीन (China) की गिरती जन्मदर और घटती शादियों की संख्या ने वहाँ की सरकार और शैक्षणिक संस्थानों को अब एक अनोखे रास्ते पर चलने के लिए मजबूर कर दिया है। दुनिया भर में अपनी कठिन परीक्षाओं और एकेडमिक प्रेशर के लिए मशहूर चीन में अब हवा का रुख बदल रहा है। सिचुआन (Sichuan) के एक प्रमुख एविएशन कॉलेज ने अपने छात्रों और शिक्षकों के लिए एक अनोखा फरमान जारी किया है। "किताबें बंद करो, बाहर जाओ, फूलों को देखो और प्यार करो।"

रोमांस के लिए दी छुट्टी

सिचुआन साउथवेस्ट वोकेशनल कॉलेज ऑफ एविएशन (Sichuan Southwest College of Civil Aviation) ने 1 से 6 अप्रेल तक स्प्रिंग ब्रेक की छुट्टी की घोषणा की है। इस छुट्टी की आधिकारिक थीम ही 'सी द फ्लावर्स एंड एन्जॉय रोमांस' रखा गया है। यह कदम उस देश में बेहद चौंकाने वाला है जहाँ छात्र आमतौर पर अपनी छुट्टियों का समय भी लाइब्रेरी में बिताते हैं।

गिरती आबादी चिंता का विषय

साल 2025 में चीन की आबादी में लगातार चौथे साल गिरावट दर्ज की गई है। जन्मदर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। ऐसे में युवाओं की संख्या घट रही और है बुज़ुर्गों की संख्या बढ़ रही है। चीन में गिरती आबादी चिंता का गंभीर विषय है। इससे देश की सरकार भी परेशान है। ऐसे में देश में जनसंख्या की स्थिति में सुधार के लिए चीन की सरकार भी कई प्रयास कर रही है।

पर्याप्त समय और पैसा दोनों ज़रूरी

डेमोग्राफिक एक्सपर्ट जेम्स लियांग का मानना है कि समाज को बच्चों के पालन-पोषण के लिए पर्याप्त समय और पैसा, दोनों चाहिए। उनका कहना है कि युवाओं को बड़े परिवारों के लाभ समझाने के साथ-साथ सरकार को वित्तीय सहायता और संसाधनों का पुनर्वितरण भी करना होगा। बढ़ती बेरोजगारी और पैसे की कमी की वजह से ही चीन में युवा शादी और बच्चे पैदा करने से कतरा रहे हैं।

'चाइल्ड-फ्रेंडली' शहरों की तैयारी

सिर्फ छुट्टियाँ ही नहीं, चीन का राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग अब बच्चों के अनुकूल शहरों के निर्माण पर जोर दे रहा है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और मनोरंजन की सुविधाओं को बेहतर बनाकर परिवारों पर से आर्थिक और सामाजिक बोझ कम करने की कोशिश की जा रही है।