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24 घंटे से हॉर्मुज सुनसान, एक भी जहाज नहीं गुजरा, अमेरिका बोला- अब तक 53 टैंकर वापस लौटे, 4 को करना पड़ा तबाह

Hormuz Strait closed: हॉर्मुज स्ट्रेट में 24 घंटे से एक भी जहाज नहीं गुजरा है। अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकेबंदी जारी है। अब तक 58 जहाजों को रोका गया है।

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भारत

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Mukul Kumar

May 09, 2026

Strait of Hormuz

हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरता जहाज (Representative Image- IANS)

पिछले 24 घंटे में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जल मार्ग हॉर्मुज स्ट्रेट से एक भी जहाज गुजर नहीं पाया है। अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब इस रास्ते पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है।

पहले यहां रोजाना औसतन 130 से ज्यादा जहाज गुजरते थे। इसके बंद होने से अब तेल की आपूर्ति, व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

युद्ध के बाद थम गया समुद्री यातायात

मरीन ट्रैफिक के आंकड़ों के हवाले से आरटी ने यह जानकारी दी है। हॉर्मुज स्ट्रेट से टैंकर रोजाना करोड़ों बैरल तेल लेकर निकलते थे। लेकिन अब जहाजों का आना-जाना बंद हो गया है।

इस बीच खाड़ी के देश एकजुट होकर ईरान पर दबाव बना रहे हैं। कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के शीर्ष राजनयिकों ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि हॉर्मुज में पहले जैसा यातायात फिर से शुरू होना चाहिए।

सऊदी अरब और कुवैत कर रहे एक प्रस्ताव तैयार

सऊदी अरब और कुवैत अमेरिका के साथ मिलकर एक प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। इस प्रस्ताव में ईरान से मांग की गई है कि वह जहाजों पर हमले बंद करे, गैरकानूनी टोल वसूलना छोड़े और समुद्र में बिछाए गए माइन्स की सारी जानकारी दे।

साथ ही मानवीय सहायता के लिए एक सुरक्षित कॉरिडोर बनाने में भी ईरान को सहयोग करना होगा। इन देशों का कहना है कि इससे खाद्यान्न, उर्वरक और जरूरी सामान आसानी से पहुंच सकेगा।

हॉर्मुज में अब भी अमेरिकी सेना तैनात

उधर, अमेरिका सेना अब भी ईरान को सबक सिखाने के लिए हॉर्मुज में डेरा डाले बैठी हुई है। अमेरिका की ईरान पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी अब भी पूरी तरह से लागू है।

इस बीच, अमेरिकी सेना ने जानकारी दी है कि उनकी नौसेना ने 13 अप्रैल से अब तक कुल 58 व्यापारिक जहाजों को रास्ता बदलने को मजबूर किया है, जबकि 4 जहाजों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया गया है।

यह कार्रवाई इसलिए की जा रही है ताकि कोई भी जहाज ईरानी बंदरगाहों में अंदर-बाहर न जा सके। इस नाकेबंदी के कारण हॉर्मुज में जहाजों का यातायात लगभग थम सा गया है, जिससे तनाव और बढ़ने की उम्मीद है।

वैश्विक चिंता बढ़ी

इस बीच, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक चली तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। कई देश पहले से ही ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं। खाड़ी देशों और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिशें तेज हो गई हैं।