कोरोना वायरस संक्रमण प्रकृति द्वारा मानव को दी गई एक सजा: चीनी रिसर्चर कोरोना वायरस चमगादड़ कोरोनो वायरस से 96 प्रतिशत मिलता-जुलता
बीजिंग। कोरोना वायरस (Coronavirus) के जानलेवा संक्रमण को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मेडिकल इमरजेंसी की घोषणा की है। इसके साथ ही दुनियाभर में इसको लेकर एक भय का माहौल पैदा हो चुका है। इसी बीच एक खबर आई थी कि कोरोना वायरस एक फेल हुए लैब टेस्टिंग ( Lab testing ) का नतीजा है। एक विदेशी रिसर्चर ( Researcher ) ने शक जताया कि चीन के वुहान शहर में प्रसारित नए कोरोना वायरस संक्रमण का स्रोत किसी प्रयोगशाला की निकासी का परिणाम है। अब चीनी विशेषज्ञों ने स्पष्टीकरण देते हुए इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
कोरोना वायरस संक्रमण प्रकृति द्वारा मानव को दी गई एक सजा
चीनी विशेषज्ञों ने तथ्यों के साथ यह साबित किया कि यह संदेह बिल्कुल निराधार है। नए कोरोना वायरस संक्रमण का स्रोत प्राकृतिक ही है। चीनी विज्ञान अकादमी के तहत वुहान वायरस रिसर्च लैब में रिसर्चक शी जंग ली ने कहा कि नया कोरोना वायरस संक्रमण प्रकृति द्वारा मानव को दी गई एक सजा है। इसका किसी लैब के साथ कोई संबंध नहीं है। शी जंग ली के सहयोगी, अमरीकी रोग इकोलॉजिस्ट पीटर दासजेक ने भी मीडिया से इस बारे में बात की। उन्होंने कहा कि जब कभी कोई नया वायरस सामने आता है, तभी इस तरह की चर्चा सुनाई देती है। यह शर्मनाक बात है।
कोरोना वायरस चमगादड़ कोरोनो वायरस से 96 प्रतिशत मिलता-जुलता
23 जनवरी को शी जंग ली ने रिसर्च का परिणाम जारी किया कि वुहान में फैला नया कोरोना वायरस चमगादड़ कोरोनो वायरस से 96 प्रतिशत मिलता-जुलता है। इसका मतलब है कि वुहान के नए कोरोना वायरस का स्रोत 18 साल पहले फैले सार्स की तरह चमगादड़ ही है। उधर, चीनी जूंगशान विश्वविद्यालय के मेडिकल स्कूल के प्रधान क्वो ड यीन ने भी कहा कि जीन अनुक्रम पर आधारित विश्लेषण के परिणाम की भी पुष्टि की गई है कि वायरस का स्रोत प्राकृतिक ही है।
चीन का विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य देशों के साथ सहयोग
इधर के दिनों में, विश्व के अन्य देशों में रिसर्चर्स ने इस वायरस के जीन अनुक्रम को साझा किया है। वाशिंगटन विश्वविद्यालय के जैव सूचना विज्ञान विशेषज्ञ ट्रेवर बेडफोर्ड ने कहा कि वायरस किसी इंसान के शरीर में प्रविष्ट होने के बाद इंसानों-से-इंसानों के बीच फैलता है। वुहान में नये कोरोनावायरस संक्रमण होने के बाद चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य देशों के साथ सहयोग किया और संबंधित टीके पर रिसर्च भी किया जा रहा है।