रक्षा मंत्रालय ने कहा कि दोनों सेनाओं का यह संयुक्त अभ्यास 'हरिमाऊ शक्ति' मलेशिया के हुलु लंगत जिले के सेंगई पर्डिक के घने जंगलों में होगा।
नई दिल्ली। भारत और मलेशिया 30 अप्रैल से दो हफ्ते का सैन्य अभ्यास करेंगे। इसका मकसद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि दोनों सेनाओं का यह संयुक्त अभ्यास 'हरिमाऊ शक्ति' मलेशिया के हुलु लंगत जिले के सेंगई पर्डिक के घने जंगलों में होगा। मंत्रालय के मुताबिक, "अभ्यास का लक्ष्य दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना है. साथ ही जंगल वाले क्षेत्र में उग्रवाद निरोधक अभियान चलाने में दोनों दस्तों के बीच विशेषज्ञता साझा करना है।"
इस अभ्यास में 4 ग्रेनेडियर्स भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व करेगा जिसे पांरपरिक और उग्रवाद निरोधक युद्ध में अभियान का अच्छा खासा अनुभव है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया है कि मलेशियाई दस्ते का प्रतिनिधित्व 1 रॉयल रेंजर रेजीमेंट और रॉयल मलय रेजीमेंट करेंगे जिन्हें जंगल में युद्ध का अनुभव है। बताय जा रहहा है कि यह एक अनूठा सनीय अभ्यास होगा जिसमें जंगलों के बीच युद्ध कौशल को वरीयता दी जाएगी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक "यह ऐसा पहला मामला है जिसमें मलेशियाई जमीन पर भारतीय और मलेशियाई सैनिकों के बीच इस स्तर का प्रशिक्षण अभ्यास आयोजित किया जा रहा है"। इस अभ्यास का लक्ष्य दोनों देशों के सैन्य सहयोग एवं समन्वय को बढ़ावा देना और जंगली इलाके में उग्रवाद निरोधक अभियान चलाने में अपने कौशल को साझा करना है।
बता दें कि मलेशिया भारत का पुराना सहयोगी देश है। भारत और मलेशिया दोनों पुराने रणनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक साझीदार हैं। पहली बार दोनों देशों की सेनाओं के इस सैन्य अभ्यास से दोनों देश युद्ध क्षेत्र में एक दूसरे के कौशल का पूरा इस्तेमाल करेंगे। दोनों देश एक दूसरे की युद्ध कलाओं से लाभान्वित होने की कोशिश करेंगे। 30 अप्रैल से शुरू होने वाले इस सैन्य अभ्यास की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दोनों देश के वरिष्ठ अधिकारियों ने हर तैयारी का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद इस अभ्यास को हरी झंडी दी है।