ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार विश्व बैंक के पास पुर्नविचार की अपील करने का फैसला कर चुकी है। अहम् प्रश्न यह है कि इमरान खान के नेतृत्व में बनने वाली अगली सरकार इस फैसले पर क्या रुख अपनाती है।
इस्लामाबाद। इमरान खान के पीएम बनने के साथ ही उन्हें जल्द ही कुछ अहम् मुद्दों पर फैसला करना होगा। उन्हें इस बात का फैसला करना होगा कि पाकिस्तान की नई सरकार को भारत के साथ सिंधु नदी विवाद को लेकर विश्व बैंक के पास अपील करेगी या नहीं। फिलहाल तो ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार विश्व बैंक के पास पुर्नविचार की अपील करने का फैसला कर चुकी है। अहम् प्रश्न यह है कि इमरान खान के नेतृत्व में बनने वाली अगली सरकार इस फैसले पर क्या रुख अपनाती है।
बता दें कि पाकिस्तान के आम चुनाव में इमरान खान की पार्टी पीटीआई को जोरदार कामयाबी मिली है। उलझे चुनावी गणित के बीच पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को अन्य दलों पर बढ़त हासिल हो गई है। हालांकि पाकिस्तान में हंग असेम्बली बनी हुई है। नेशनल एसेंबली चुनाव में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन पार्टी बहुमत से 22 कदम दूर रह गई। पार्टी सरकार बनाने के लिए निर्दलीयों और छोटी पार्टियों से समर्थन हासिल करने के लिए जोरदार प्रयास कर रही है। जल्द ही इमरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सकते हैं।
विश्व बैंक जाएगी पकिस्तान सरकार
फिलहाल पाकिस्तानी सत्ता के गलियारों में इस बात की चर्चा गरम है कि सरकार 1960 के इस समझौते को लेकर मध्यस्थता पंचाट गठित करने की मांग भी करेगी। इससे पहले जम्मू कश्मीर में किशनगंगा (330 मेगावॉट) और रातले (850 मेगावॉट) पनबिजली परियोजनाओं की डिजाइन पर सवाल उठाते हुए पाकिस्तान ने पिछले साल वर्ल्ड बैंक से इन भरतीय परियोजनाओं पर रोक लगाने की मांगी की थी।
पाकिस्तान की मुहिम को समर्थन को दावा
पाकिस्तान के कार्यवाहक जल संसाधन मंत्री सैयद अली जफर ने दावा किया है कि विश्व बैंक पाकिस्तान के निवेदन पर सकारात्मक प्रक्रिया नहीं दे रहा जबकि भारत के समर्थन में फैसले आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब स्थिति बदल रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में नई सरकार सत्ता में आ रही है। पाकिस्तान की इस मुहिम को चीन, रूस और तुर्की जैसे देशों का समर्थन भी मिल रहा है।