भारत अपनी संप्रभुता के उल्लंघन की बात कहकर OBOR का शुरू से विरोध करता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका पुरजोर विरोध दर्ज कराया है।
बीजिंग। साढ़े आठ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की योजना, 80 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का समर्थन लेकिन अकेले भारत ने चीन को बड़ा झटका दे दिया। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में मौजूद आठ देशों में से अकेले भारत ने चीन की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड परियोजना का विरोध किया है। दरअसल, भारत अपनी संप्रभुता के उल्लंघन की बात कहकर चीन की इस योजना का शुरू से विरोध करता रहा है। दो दिवसीय एससीओ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका पुरजोर विरोध दर्ज कराया है। समिट के समापन के मौके पर एक घोषणापत्र जारी किया गया है, जिसमें कहा गया कि रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और तजाकिस्तान ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशटिव (बीआरआई) को समर्थन दिया है।
...एससीओ में ऐसे बोले प्रधानमंत्री मोदी
वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) पर अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'किसी बड़ी संपर्क सुविधा परियोजना में सदस्य देशों की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि समावेशिता सुनिश्चित करने वाली सभी पहलों के लिए भारत की ओर से पूरा सहयोग मिलेगा। भारत ऐसी किसी परियोजना को स्वीकार नहीं कर सकता जो संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर उसकी मुख्य चिंता को अनदेखा करती हो।' जिनपिंग की मौजूदगी में मोदी ने यह भी कहा कि भारत चाबहार बंदरगाह और अशगाबाद (तुर्कमेनिस्तान) समझौते के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा परियोजना में भी शामिल है।
...इसलिए है भारत को आपत्ति
दरअसल 2013 में सामने आई इस परियोजना की रूपरेखा के मुताबिक इसका मकसद दक्षिण-पूर्वी एशिया, मध्य एशिया, खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका और यूरोप को जल-थल के जरिए एक परिवहन मार्ग से जोड़ना है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस महत्वकांक्षी परियोजना का एक हिस्सा सीपीईसी (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) के रूप में भारत के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरता है।