एशिया

पाकिस्तान: पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ के समर्थन में उतरी PAK सेना, कहा- वे देशद्रोही नहीं हो सकते

पाकिस्तान की एक विशेष अदालत ने देशद्रोह के मामले में परवेज मुशर्रफ को फांसी की सजा सुनाई है मुशर्रफ पर पाकिस्तान में तीन नवंबर 2007 को आपातकाल लगाने के लिए देशद्रोह का मामला चल रहा है

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Dec 17, 2019

इस्लामाबाद।पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परेवज मुशर्रफ ( Retired General Pervez Musharraf ) को देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है। इसे लेकर पाकिस्तान में सियासत गर्म हो गई है। अब पाकिस्तान की सेना भी मुशर्रफ के समर्थन में आ गई है।

पाकिस्तान की एक विशेष अदालत द्वारा राजद्रोह के एक मामले में मुशर्रफ को मौत की सजा सुनाने पर पाकिस्तानी सेना देश की न्यायपालिका पर हमलावर हो गई है। पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक मीडिया विंग इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस ( ISPR ) ने एक बयान में अदालत के फैसले पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा कि 'समूची पाकिस्तानी सेना ने इस फैसले को पूरी पीड़ा के साथ महसूस किया है।'

देशद्रोही नहीं हो सकते मुशर्रफ: सेना

ISPR ने कहा कि मुशर्रफ, जिन्होंने सैन्य प्रमुख, ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष और पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में 40 से अधिक वर्षों तक सेवा की देश की रक्षा के लिए युद्ध लड़े, वे निश्चित रूप से कभी देशद्रोही नहीं हो सकते।

कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताते हुए सेना ने कहा कि विशेष अदालत ने जल्दबाजी में मामले को समाप्त करने के अलावा कानूनी प्रक्रियाओं को भी नजरअंदाज किया है।

ISPR ने कहा कि सशस्त्र बल अभी भी इस्लामी गणतंत्र पाकिस्तान के संविधान के अनुरूप न्याय की उम्मीद कर रहा है। बता दें कि इससे इतर सेना की नाराजगी को देखते हुए सरकार ने भी कहा है कि वह कोर्ट के फैसले की समीक्षा करेगा और उसके बाद कोई कदम उठाएगा।

इस मामले में देशद्रोह साबित

आपको बता दें कि मुशर्रफ पर देश में तीन नवंबर 2007 को आपातकाल लगाने के लिए देशद्रोह का मामला चल रहा है। पाकिस्तान की तत्कालीन मुस्लिम लीग नवाज शरीफ की सरकार ने यह मामला दर्ज कराया था और 2013 से यह लंबित चल रहा था। दिसंबर 2013 में परवेज मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज हुआ था।

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा

इसके बाद 31 मार्च 2014 को कोर्ट ने मुशर्रफ को आरोपी करार दिया और उसी साल सितंबर में अभियोजन ने सारे साक्ष्य विशेष अदालत के सामने रखे। बाद में वे शीर्ष अदालतों और गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद मार्च 2016 में पाकिस्तान से बाहर चले गए।

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Updated on:
18 Dec 2019 08:15 am
Published on:
17 Dec 2019 10:06 pm
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