2010 में सुनाई गई यह सजा पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गई थी
लाहौर। ईशनिंदा के मामले में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने ईसाई महिला आसिया बीबी को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए आसिया बीबी की सजा पर रोक लगा दी है। दरअसल इस मामले में ईशनिंदा के आरोप में आसिया बीबी को नवंबर 2010 में मौत की सजा सुनाई गई थी। लाहौर की हाईकोर्ट ने 2012 में इस फैसले पर सहमति जताई थी, जिसके बाद आसिया बीबी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं।
फैसाल 3 हफ्ते पहले ही ले लिया गया
पाक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस साकिब निसार की अध्यता वाली तीन सदस्यों की पीठ ने बुधवार को ये फैसला सुनाया। हालांकि ये फैसाल 3 हफ्ते पहले ही ले लिया गया था, लेकिन ईशनिंदा के समर्थकों की तरफ से प्रदर्शन करने की धमकी दिए जाने के चलते फैसला सुनाने में देर हुई। चीफ जस्टिस निसार ने अपने फैसले में ये भी कहा है कि अगर आसिया बीबी पर और कोई चार्ज नहीं है तो उन्हें तुरंत छोड़ दिया जाए।
क्या था पूरा मामला?
लाहौर के निकट शेखपुरा जिले के ननकाना कस्बे में रहने वाली आसिया बीबी पर साल 2009 में ईशनिंदा का इल्जाम लगा। घटना के मुताबिक आसिया बीबी खेत में मजदूरी कर रही थीं। उस वक्त गांव के एक बुज़ुर्ग की पत्नी ने उनसे पीने के लिए पानी भरने को कहा. बताया जाता है कि वहीं मजदूरी कर रही दूसरी मुस्लिम महिलाओं ने एक गैर-मुस्लिम, आसिया बीबी द्वारा लाए पानी को ‘अशुद्ध’ कह कर पीने से इनकार कर दिया। आसिया बीबी का अपराध यह था कि उन्होंने इस भेदभाव पर सवाल कर दिया कि ‘क्या हम इंसान नहीं हैं?’आसिया बीबी के सवाल ने बहस की शक्ल अख्तियार कर ली। गांव की नाराज महिलाओं ने स्थानीय मौलवी कारी सलीम से इस विवाद की शिकायत की और आसिया बीबी पर पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप मढ़ दिया। हालांकि आसिया बीबी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से लगातार इनकार किया।