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#MeToo: प्रिया रमानी के खिलाफ दिल्ली कोर्ट में एम जे अकबर ने दर्ज कराया बयान, 12 नवंबर को सुनवाई

मानहानि केस में पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर बुधवार को कोर्ट में दर्ज करायेंगे बयान

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#MeToo: प्रिया रमानी के खिलाफ दिल्ली कोर्ट में आज बयान दर्ज कराएंगे एम जे अकबर

नई दिल्ली। पूर्व पत्रकार और भाजपा नेता एमजे अकबर आज दिल्ली कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया है। कोर्ट में दिए बयान में अकबर ने कहा, "प्रिया रमाणी का पहला ट्वीट मेरी नज़र में तब आया, जब मैं अपने आधिकारिक दौरे से लौटा... उस ट्वीट में एक आलेख का लिंक था, जो 'ङ्कशद्दह्वद्ग' पत्रिका में प्रकाशित हुआ था..." एमजे अकबर ने कहा, इस आलेख के कई हिस्से मानहानि करने वाले हैं। इन ट्वीट ने मुझे डीफेम किया, मेरी छवि खराब की।

दरअसल पत्रकार प्रिया रमानी पर अकबर की ओर से किए गए मानहानि मामले में आज अकबर को अपना बयान दर्ज करवाना है। आपको बता दें प्रिया रमानी ने अकबर पर #MeToo अभियान के तहत अकबर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।


शुरुआती सबूत भी किए जाएंगे पेश
मानहानि मामले के तहत एमजे अकबर ने प्रिया रमानी पर धारा 499 और 500 के तहत केस किया है। आपको बता दें कि कोर्ट में आज इस मामले से जुड़े शुरुआती सबूत भी पेश किए जाने हैं। दरअसल 17 अक्टूबर को अकबर ने बतौर जूनियर विदेश मंत्री अपना पद छोड़ दिया था। उनके खिलाफ 15 महिलाओं ने यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे।

आज ही होगी मामले की सुनवाई
दरअसल पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर की तरफ से पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले को लेकर पटियाला हाउस कोर्ट में बुधवार को सुनवाई होगी। एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल की अदालत में बुधवार को एमजे अकबर अपना बयान दर्ज करायेंगे। आपको बता दें कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि 31 अक्टूबर को शिकायतकर्ता एमजे अकबर का बयान दर्ज किया जाएगा और कोर्ट उसी दिन इस मामले को सुनेगी।

अकबर ने 'मीटू' को बताया था वायरल फीवर
एमजे अकबर तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता गीता लूथरा ने अदालत में मामले से संबंधित जानकारी दाखिल की थी। कोर्ट को पूरे मामले से अवगत कराते हुए कहा था कि ट्वीट और सोशल मीडिया के पोस्ट याचिकाकर्ता की छवि को खराब कर रहे हैं। प्रिया रमानी का नाम उस वक्त चर्चा में आया जब उन्होंने 8 अक्टूबर को ट्विटर पर अकबर के खिलाफ यौन दुर्व्यवहार की बात लिखी। हालांकि अकबर ने इन आरोपों का खंडन किया और मीटू कैंपेन को एक वायरल फीवर बताया।

इस बीच, बीस महिला पत्रकारों ने अदालत से उनके साक्ष्य पर विचार करने और गवाहों के रूप में बुलाए जाने का आग्रह किया है। अकबर मोदी सरकार के पहले ऐसे मंत्री हैं जिन्हें यौन शोषण मामले की वजह से पद छोड़ना पड़ा। इस्तीफा देने से पहले अकबर ने कहा था कि वह झूठे आरोपों से लड़ेंगे।

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