चीन के किंगडाओ शहर में होने वाले दो दिन के शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सभी देशों से अपील की है कि वो वैश्विक आतंकवाद और सुरक्षा के बढ़ते खतरों के प्रति सख्त रवैया अपनाएं
नई दिल्ली। चीन के किंगडाओ शहर में होने वाले दो दिन के शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सभी देशों से अपील की है कि वो वैश्विक आतंकवाद और सुरक्षा के बढ़ते खतरों के प्रति सख्त रवैया अपनाएं। पीएम ने शंघाई सहयोग संघटन के 18 वें सत्र में बोलते हुए कहा कि सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
क्या कहा पीएम ने
पीमए मोदी ने आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अपने नागरिकों की सुरक्षा सभी देशों का प्राथमिक कर्तव्य होना चाहिए। उन्होंने सुरक्षा के लिए 6 सूत्रीय कदम उठाने पर जोर दिया। अफगानिस्तान का उलेख करते हुए पीएम ने वहां आतंकवाद के पुरे तरह खात्मे की जरूरत बताई। पीएम मोदी ने कहा कि अफगान राष्ट्रपित गनी ने शांति की तरफ जो कदम उठाए हैं, उनका क्षेत्र में सभी को सम्मान करना चाहिए।इस दौरान उन्होंने एससीओ सदस्य देशों को संबोधित करते हुए कहा कि पड़ोसियों के साथ कनेक्टिविटी भारत की नीति का हिस्सा है। पीएम मोदी ने कहा कि सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए पीएम मोदी ने सिक्योर नामक एक नया मंत्र भी दिया । पीएम ने सदस्य देशों द्वारा एक दूसरे की सम्प्रभुता का सम्मान करने की जरुरत पर बल दिया।
आपसी संपर्कों पर जोर
पीएम ने एससीओ सदस्य देशों को संबोधित करते हुए कहा कि 'हम फिर से एक मंच पर पहुंचे हैं जहां भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी भूगोल की परिभाषा को बदल रही है। इसलिए, हमारे पड़ोस और एससीओ क्षेत्र में कनेक्टिविटी हमारी प्राथमिकता है।'
आपसी पर्यटन बढ़ाने पर जोर
पीएम मोदी ने एससीओ देशों के बीच आपसी पर्यटन बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि भारत में केवल 6% विदेशी पर्यटक एससीओ देशों से आते हैं, इसे आसानी से दोगुना कर दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों की आपसी संस्कृतियां कहीं न कहीं एक दूसरे से सम्बद्ध हैं। पीएम ने भारत में एससीओ खाद्य त्यौहार और बौद्ध त्यौहार आयोजित करने की भी घोषणा की।
बता दें कि भारत पिछले साल ही शंघाई सहयोग संगठन का पूर्ण सदस्य बना था। एससीओ के पूर्ण सदस्यों में भारत, चीन, रूस, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं जबकि अफगानिस्तान, मंगोलिया, इरान और बेलारूस पर्यवेक्षक हैं।