
वाशिंगटन। पिछले महीने यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के रियाद पर मिसाइल दागी गई थी। इसे अमरीकी डिफेंस सिस्टम ने हवा में गिराने का दावा किया था। इस दावा झूठा साबित हुआ है। फोटो और वीडियो सबूतों के आधार पर मिसाइल विशेषज्ञों के शोध दल ने पाया है कि मिसाइल टारगेट के करीब पहुंच गई थी और यह अमरीकी डिफेंस सिस्टम को यह चकमा देने में कामयाब रही थी। रियाद एयरपोर्ट के करीब धमाके से घरेलू हवाई अड्डे पर कई यात्रियों ने झटका महसूस किया था।
20 किमी दूर रह गई थी मिसाइल
रियाद में जब हूती विद्रोहियों की मिसाइल को गिराया गया, तब वह एयरपोर्ट से महज 20 किमी की दूरी पर थी। यह करीब 970 किमी का सफर तय कर निशाने के करीब तक पहुंच गई थी।
उ.कोरिया के परीक्षण की तस्वीरें थीं झूठी
वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया के हालिया मिसाइल परीक्षण के दावे पर भी सवाल खड़े हुए हैं। मिसाइल परीक्षण की तस्वीरें खगोल विज्ञान से जुड़े अध्येताओं ने फर्जी करार दी हैं। इनमें तारामंडल दिखाई दे रहा है, वह दो तस्वीरों में अलग-अलग है। नीदरलैंड्स के खगोल विज्ञान अध्येता डॉ मार्को लांगब्रोक ने इन तस्वीरों को झूठ बताया है। इन तस्वीरों में जो तारामंडल दिखाई दे रहा है, वह एक ही वक्त पर अलग-अलग दिशाएं बता रहा है।
मिसाइल परीक्षण था धोखा
एक तस्वीर में दक्षिण-पूर्व आसमान में कालपुरुष (ओराइन) तारामंडल है। दूसरी में उत्तर-पश्चिम का आसमान है, जहां एंड्रोमेडा नामक तीन तारे हैं।
तारों की स्थिति पर शक
ओराइन और एंड्रोमेडा एक-दूसरे से विपरीत दिशा में होते हैं। यह एक ही दिशा से दिखाई नहीं दे सकते।
तारों की स्थिति है अलग
मिसाइल परीक्षण की तस्वीरें फोटोशॉप से बदलने की बात कही जा रही है। सबूत के तौर पर एक ही कोण से खींची गई, एक ही समय की तस्वीर में दो अलग-अलग आकाशीय स्थितियां पेश की गई हैं।