
सियोल ( दक्षिण कोरिया) : दक्षिण कोरिया में एक 21 वर्षीय युवक को छह महीने के भीतर लगभग 30 किलोग्राम वजन बढ़ाकर अनिवार्य सैन्य सेवा से बचने की कोशिश करने का दोषी पाया गया है । चांगजू जिला न्यायालय ने उस व्यक्ति को जेल की सजा सुनाई है । लेकिन सजा को साउथ कोरिया के फेडरल सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेशों तक स्थगित रखा गया है।
क्या है मामला
मामला 2016 का है जिसमे अब कोर्ट ने सजा सुनाई है। बताया जा रहा है कि अनिवार्य सैनिक ड्यूटी से बचने के लिए इस युवक ने जानबूझकर 29 किलोग्राम वजन बढ़ा लिया है। 180 सेंटीमीटर लम्बे इस व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी गई है। बताया जा रहा है कि पहले इस युवक का वजन 87 किलो था लेकिन बाद में वजन बढाकर वह 113.6 किलोग्राम का बन गया। इस युवक का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 36.1 था, जो सेना की सेवा की आवश्यकता से कम था। इसलिए उन्हें एक अन्य रक्षा सेवा के लिए उत्तरदायित्व सौंपा गया था । लेकिन बाद में पुलिस ने जांच में पाया कि उसने अपने सैन्य कर्तव्य से बचने के उद्देश्य से वजन बढ़ाया।
दक्षिण कोरिया में अनिवार्य है सैनिक सेवा
दक्षिण कोरिया में सभी स्वस्थ और सामान्य युवकों के लिए अनिवार्य सैनिक सेवा का प्रावधान है और किसी भी रूप में इससे बचने की कोशिश करने वालों के लिए कठोर दंड की सजा मिलती है। कानून के तहत, व्यक्ति को वजन वढाने, खुद को हानि पहुँचाने और जानबूझ कर किसी मुसीबत में पड़कर सैन्य सेवा से बचने के लिए पांच साल की अधिकतम सजा हो सकती है। इस युवक के मामले में अदालत को पांच साल जेल की सजा लागू करने की शक्ति थी क्योंकि दक्षिण कोरियाई कानून में यह कहा गया है कि जो लोग 20 महीने की सैन्य सेवा से भागने के लिए जानबूझकर खुद को चोट पहुंचाने या अन्य किसी तरह से सेवा देने से परहेज करते हैं, उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है।
मानवाधिकार संगठन करते रहे हैं आलोचना
गौरतलब है कि इस अनिवार्य सेवा की प्रवृत्ति की मानवाधिकार संगठनों द्वारा कड़ी निंदा की गई है। मानवाधिकार वादी कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे युवकों के मानसिक और सामाजिक विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। 2014 में, एक 22 वर्षीय सर्जेंट ने सात सहयोगियों पर एक ग्रेनेड फेंक दिया था ।उसने दो और सैनिकों को गोली मार दी थी । इस घटना में कुल मिलाकर, पांच लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए। एसजीटी लिमनाम के इस युवक पर बाद में मुक़दमा चलाया गया और फरवरी 2015 में दोषी ठहराया गया । उसे मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई थी ।