विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि क्षेत्र की वास्तविक क्षमता को साकार करने के लिए सभी देशों में सहयोग की भावना होनी चाहिए।
हनोई। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र की वास्तविक क्षमता दुनिया के सामने दिखाने का समय आ गया है। हिंद महासागर क्षेत्र, भारत-प्रशांत क्षेत्र का एक केंद्रीय घटक है। इस समहू के देशों में सामूहिक कार्रवाई का एक दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की वास्तविक क्षमता को साकार करने के लिए सभी देशों में सहयोग की भावना होनी चाहिए।
हिन्द महासागर सम्मलेन का उद्घाटन
तीसरे हिंद महासागर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए सुषमा स्वराज ने कहा, "हिंद महासागर को 'रत्नकली' या खजाने के महासागर के रूप में जाना जाता था। इस क्षेत्र का हमारा दृष्टिकोण सामूहिक सहयोग और समन्वय का है। इसलिए, शांति और स्थिरता के माहौल को पोषित करना हमारी विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण प्राथमिकता होने चाहिए। हमें शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के विचार को प्रतिबद्ध करना है।" एक स्वतंत्र और समावेशी भारत-प्रशांत क्षेत्र के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को दोहराते हुए स्वराज ने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण बनाना महत्वपूर्ण है। भारतीय विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत-प्रशांत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले देशों को हिंद महासागर में शांति और समृद्धि प्राप्त करने के लिए काम करने का प्रयास करना चाहिए।
विकास के केंद्र के रूप में हिंद महासागर क्षेत्र को संबोधित करते हुए स्वराज ने कहा कि महासागर का आर्थिक महत्व एक महत्वपूर्ण सामरिक स्थान रखता है। इस क्षेत्र में समुद्री चुनौतियों के बारे में बात करते हुए सुषमा स्वराज ने स्पष्ट किया, "सुरक्षा एक पुरानी अवधारणा है और इसमें पारंपरिक, गैर पारंपरिक और नए उभरते खतरे शामिल हैं। इनमें समुद्री आतंकवाद, तस्करी, अंतर्राष्ट्रीय अपराध, नशीली दवाओं की तस्करी, और अनियमित मछली पकड़ना शामिल है। चुनौतियों की इस विविध प्रकृति के लिए क्षेत्रीय और बहुपक्षीय दोनों स्तरों पर प्रभावी साझेदारी की आवश्यकता है।"
आसियान हिन्द महासागर क्षेत्र का महत्वपूर्ण घटक
इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा हासिल करने के लिए हिन्द महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए) को एक उपकरण के रूप में मानते हुए विदेश मंत्री स्वराज ने आगे कहा, "हम नीली अर्थव्यवस्था और अक्षय ऊर्जा सहित समस्त समुद्री गतिविधियों का समर्थन कर रहे हैं। आईओआरए का ध्यान समुद्री सुरक्षा मुद्दों की गंभीरता की ओर है। यह एक सहकारी तंत्र विकसित करने में मदद करता है।" विदेश मंत्री ने कहा कि इस समूचे क्षेत्र के विकास के लिए आसियान सबसे जरुरी कड़ी है।