
Somwar Upay: सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने और कुछ विशेष उपाय अपनाने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। शिव भक्तों का विश्वास है कि सोमवार की शुरुआत भगवान भोलेनाथ के स्मरण से करने पर पूरे सप्ताह सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। अगर आप रुके हुए कार्यों में गति, करियर में सफलता, आर्थिक स्थिरता और मानसिक शांति चाहते हैं, तो सोमवार के दिन कुछ विशेष उपाय अपनाए जा सकते हैं।
पंडित सुदामा शर्मा के अनुसार, सोमवार को किए गए कुछ सरल धार्मिक उपाय भगवान शिव के साथ-साथ माता लक्ष्मी की कृपा भी दिलाने वाले माने जाते हैं। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।
सोमवार की सुबह स्नान के बाद भगवान शिव के शिवलिंग पर शुद्ध जल और दूध अर्पित करें। यदि संभव हो तो इसमें थोड़ा गंगाजल भी मिलाएं। पूजा के दौरान गौरी-शंकर रुद्राक्ष अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस उपाय से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं।
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और मन को शांति मिलती है। अभिषेक के बाद शिवलिंग को स्वच्छ जल से अवश्य स्नान कराएं।
सोमवार के दिन महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है। प्रतिदिन या कम से कम सोमवार को 108 बार इस मंत्र का जाप करने से स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन की कठिनाइयों में राहत मिलने की मान्यता है।
मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' सबसे प्रभावशाली मंत्रों में से एक माना जाता है। सोमवार को शांत मन से इस मंत्र का नियमित जाप करने से नकारात्मकता दूर होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और मन एकाग्र रहता है। कई श्रद्धालु इसे पूरे सप्ताह की सकारात्मक शुरुआत का माध्यम भी मानते हैं।
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सोमवार के दिन शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इसका पाठ प्रातः स्नान के बाद एकांत स्थान पर किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में इसका पाठ करना सबसे उत्तम माना जाता है।
पूजा वसान समये दशवक्त्र गीतं यः शंभु पूजन परं पठति प्रदोषे।
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्र तुरङ्ग युक्तां लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः॥
इस श्लोक का भावार्थ है कि जो व्यक्ति भगवान शिव की पूजा के बाद, विशेष रूप से प्रदोष काल में श्रद्धा और भक्ति के साथ रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करता है, उस पर भगवान शिव सदैव प्रसन्न रहते हैं। उनकी कृपा से भक्त को स्थायी धन-संपत्ति, सुख-समृद्धि, सम्मान, ऐश्वर्य और जीवन में शुभता प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ऐसे साधक के जीवन में स्थिर लक्ष्मी का वास कराते हैं और उसके कार्यों में सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।