
Aja Ekadashi : सनातन धर्म में एकादशी तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह हर माह में दो बार पड़ती है, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशी। यह दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित है। सभी एकादशी अलग अलग नामों से जानी जाती हैं। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करने से जीवन में सुख- समृद्धि प्राप्त होती है। इस बार पंचांग भेद से 6 और 7 सितंबर को एकादशी पड़ रही है। हालांकि उदया तिथि के अनुसार 7 तारीख को ही एकादशी मनाना उचित रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि एकादशी का व्रत रख भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन निर्धन, दीन-दु:खी लोगों को दान करना चाहिए। भाद्रपद कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अजा एकादशी का विशेष महत्व है। धर्मग्रंथों के अनुसार इस एकादशी पर व्रत रखने, दान करने तथा विष्णुजी की पूजा से सभी सांसारिक सुख मिलते हैं और देहांत के बाद भक्त सीधे विष्णुलोक जाते हैं।
सनातन परंपरा में अजा एकादशी को अश्वमेघ यज्ञ के बराबर फल देने वाली कहा गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समस्त पापों का नाश करने वाली एकादशी है।
ज्योतिषाचार्य अरुण बुचके के अनुसार इस बार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर यानि रविवार को शाम को 7.30 बजे प्रारंभ होगी। यह अगले दिन यानी 7 सितंबर को शाम 5.05 बजे तक रहेगी। इस प्रकार उदया तिथि के अनुसार अजा एकादशी 7 सितंबर को मनाई जाएगी।
भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि आरंभ- 6 सितंबर को शाम में 7.30 बजे
भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि समाप्त- 7 सितंबर को शाम में 5.05 बजे
अजा एकादशी व्रत- 7 सितंबर सोमवार
सनातन संस्कृति में दान की महत्ता प्रतिपादित की गई है। एकादशी पर इसका ज्यादा महत्व है। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार अजा एकादशी के शुभ दिन अन्न दान सर्वोत्तम माना गया है। जरूरतमंदों को भोजन कराना चाहिए।