भूमि स्पर्श मंत्र: आज के इस लेख में जानते हैं कि धरती मां का शुक्रिया कैसे किया जाता है और इसके क्या फायदे हैं।
Bhumi Sparsha Mantra: आज की भागदौड़ भरी लाइफ में लोग इतनी जल्दी में रहते हैं कि सुबह आंख खुलते ही लगभग सभी का ध्यान सीधा फोन या ऑफिस के काम पर चला जाता है। घर और ऑफिस के कामों को बैलेंस करने के चक्कर में लोग अक्सर उन छोटी-छोटी चीजों को भूल जाते हैं, जो उन्हें अंदर से सुकून देती हैं। इसके चलते कई बार ऐसा महसूस होता है कि सब कुछ सही होने के बाद भी मन में वो शांति नहीं है या काम में वो पकड़ नहीं बन पा रही है। ऐसे में अगर आप भी कुछ ऐसा महसूस कर रहे हैं, तो बड़े-बुजुर्गों द्वारा बताई गई भूमि स्पर्श की एक छोटी सी आदत आपके पूरे दिन को बदल सकती है। आइए, आज के इस लेख में जानते हैं कि धरती मां का शुक्रिया कैसे किया जाता है और इसके क्या फायदे हैं।
हिंदू मान्यताओं में धरती को सिर्फ मिट्टी नहीं बल्कि मां का दर्जा दिया गया है, जो हमारा बोझ उठाती हैं। इसीलिए रोजाना सुबह बिस्तर छोड़ने और जमीन पर पैर रखने से पहले उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। इसके लिए "समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डिते, विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे" मंत्र का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है। इस मंत्र का अर्थ है "हे समुद्र रूपी वस्त्र धारण करने वाली, पर्वत रूपी स्तनों से सुशोभित, भगवान विष्णु की पत्नी धरती माता। आपको मेरा नमस्कार है। कृपया अपने ऊपर पैर रखने के लिए मुझे क्षमा करें।"
जब आप सुबह उठते ही धरती मां को नमन करते हैं, तो आपके अंदर एक सकारात्मक सोच पैदा होती है। इस मंत्र के जाप से आपके स्वभाव में गंभीरता और मानसिक मजबूती आती है। इसके साथ ही झुककर जमीन को छूना हमें याद दिलाता है कि हम प्रकृति से जुड़े हुए हैं, जिससे मन का अहंकार कम होता है और अद्भुत शांति मिलती है।
अगर आप इस मंत्र को अपनी रोजाना की आदत का हिस्सा बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको बस इतना करना है कि जैसे ही आपकी नींद खुले, जमीन पर पैर रखने से पहले अपने दाएं हाथ से धरती को स्पर्श करें। स्पर्श करते हुए मन ही मन या हल्के स्वर में ऊपर दिए गए मंत्र को पूरी श्रद्धा के साथ बोलें। इसके बाद धरती को छूने वाले उसी हाथ को अपने माथे या आंखों से लगाएं।