
Janmashtami 2026 : ललित सक्सेना, उज्जैन. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस बार केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी विशेष संयोग लेकर आ रही है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को रोहिणी के बाद मृगशिरा नक्षत्र, हर्षल के बाद वज्र योग, तैतिल के बाद वणिज करण और वृषभ राशि के चंद्रमा की साक्षी में होगी। ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डब्बावाला के अनुसार 59 साल बाद पांच प्रमुख ग्रहों की स्थिति में पुनरावृत्ति के साथ जन्माष्टमी का पर्वकाल आ रहा है। यह विशेष प्रभावकारी होगा। जन्माष्टमी पर विवाह में आ रही बाधा समाप्त करने के लिए कात्यायनी साधना प्रारंभ करना भी लाभकारी साबित हो सकता है।
अब राष्ट्र के प्रभाव का योग
पं. डब्बावाला के अनुसार ग्रहों के 1967 के बाद 2026 में सूर्य और बुध सिंह, चंद्र वृषभ, गुरु कर्क तथा शनि मीन राशि में गोचर करेंगे। इस संयोग से तकनीकी संचार, प्रशासन, आध्यात्मिकता और धर्म के क्षेत्र में परिवर्तन के संकेत हैं। 59 वर्ष पूर्व भी ऐसे ग्रह गणित के दौरान भारतीय सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन देखने को मिला था। इस बार ग्रहों की पुनरावृत्ति राष्ट्र के प्रभाव में वृद्धि का संकेत दे रही है।
ज्योतिष शास्त्र में केंद्र-त्रिकोण को प्रभावशाली माना गया है। इस योग में ग्रहों की शक्ति बढऩे से परिस्थितियों में बदलाव के संकेत मिलते हैं। सूर्य-चंद्र के विशेष योग और अन्य ग्रहों के दृष्टि संबंध साधकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। कृष्ण उपासक इस दौरान विशेष साधना और संकल्प कर सकते हैं।
जिन कन्याओं के विवाह में बाधा है, उन्हें जन्माष्टमी से भगवान कृष्ण का पूजन करते हुए माता कात्यायनी की साधना करने की सलाह दी है। वैदिक मंत्र और स्तोत्र पाठ का तीन माह तक नियमित रूप से पालन करने की बात कही गई है।
पं. डब्बावाला के अनुसार भगवान कृष्ण की भक्ति से ज्ञान, वैराग्य और जीवन के चार पुरुषार्थ की साधना का मार्ग प्रशस्त होता है। इसके लिए कृष्णाष्टकम् और कृष्ण कथा-लीलामृत के पाठ-श्रवण का संकल्प लिया जा सकता है।
सनातन धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का बहुत महत्व है। इसे सभी मनोकामनाओं को पूरा करनेवाला पर्व बताया गया है। जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह या लड्डू गोपाल की विधिविधान से पूजा करना चाहिए। उन्हें नए वस्त्र आभूषण पहनाएं और झूला झुलाएं। भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह या लड्डू गोपाल के समक्ष अपनी समस्याओं से मुक्ति की प्रार्थना करें। भक्ति भाव और पूर्ण विश्वास से की पूजा अर्चना से जीवन के दुख दर्द से धीरे धीरे मुक्ति मिलना प्रारंभ हो सकता है।